
- अम्बेडकरनगर में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित
- पीसीपीएनडीटी एक्ट पर दी गई कानूनी जानकारी
- लिंग परीक्षण कराना कानूनन अपराध: अपर जिला जज
अम्बेडकरनगर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के प्लान ऑफ एक्शन 2025-26 के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अम्बेडकरनगर के तत्वावधान में संयुक्त जिला चिकित्सालय में पीसीपीएनडीटी एक्ट (गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994) पर आधारित विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया।
शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव/अपर जिला जज श्री भारतेन्दु प्रकाश गुप्ता ने कहा कि यह अधिनियम देश में लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने हेतु लागू किया गया था। अधिनियम के अनुसार, जन्म से पहले लिंग परीक्षण कराना या कराना चाहना कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि अधिनियम का उद्देश्य भ्रूण के लिंग चयन को रोकना और प्रसव पूर्व निदान तकनीकों के दुरुपयोग पर प्रतिबंध लगाना है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पी.एन. यादव ने बताया कि अल्ट्रासाउंड जैसे परीक्षण अब केवल चिकित्सकीय आवश्यकता की स्थिति में ही प्रयोग किए जा सकते हैं। डॉ. हर्षित गुप्ता, चिकित्सालय प्रबंधक ने मुखबिर योजना की जानकारी दी, जिसके माध्यम से अवैध लिंग परीक्षण कराने वाले केन्द्रों की सूचना गोपनीय रूप से लेकर विधिक कार्रवाई की जाती है। यह योजना प्रदेश में 01 जुलाई 2017 से प्रभावी है।
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शिविर में चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल रमेश राम त्रिपाठी ने बताया कि अधिनियम के तहत किसी भी माध्यम से लिंग परीक्षण का विज्ञापन करना कानूनन दण्डनीय अपराध है। इसमें तीन से पांच वर्ष तक की कैद तथा 10,000 से 50,000 रुपये तक का जुर्माना निर्धारित है।
कार्यक्रम में डॉ. लता चौधरी, पैथोलॉजिस्ट, शरद पांडेय (असिस्टेंट एलएडीसीएस), संयुक्त जिला चिकित्सालय एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी, पैरालीगल वालंटियर आदि उपस्थित रहे।








