105 किलो चांदी के सिंहासन पर विराजमान होंगे भगवान जगन्नाथ

कानपुर। 27 जून को कानपुर की सड़कों पर एक बार फिर भक्ति, परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। जनरलगंज स्थित बाई जी मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र नगर भ्रमण पर निकलेंगे। खास बात यह है कि भगवान जगन्नाथ 105 किलो चांदी के सिंहासन पर विराजमान होकर चांदी से सजे ऐतिहासिक रथ पर सवार होंगे।

100 साल पुराना सिंहासन, 50 साल पुराना रथ
इस रथ पर विराजमान होने वाला सिंहासन करीब 100 साल पुराना है, जिसमें बारीक चांदी की कलाकारी के साथ राधा-कृष्ण की छवियां भी उकेरी गई हैं। रथ का निर्माण और सजावट कार्य पिछले एक महीने से लगातार चल रहा है। रथ बनाने वाले कारीगर जगपति विश्वकर्मा और शिवप्रसाद ने बताया कि उनका परिवार पिछले 50 वर्षों से इस सेवा में जुटा है।

45 कारीगर, 12 रथों की होती है तैयारी
रथयात्रा के लिए विशेष रूप से 45 कारीगर एक महीने पहले से रथ तैयार करने का काम शुरू कर देते हैं। रथ में प्रयुक्त लकड़ी भी 50 साल पुरानी बताई जाती है। खासतौर पर भगवान जगन्नाथ के लिए तैयार किया जाने वाला रथ भव्यता और धार्मिक भावनाओं का प्रतीक बन चुका है।

परंपरा: पहले कंधों पर कराते थे नगर भ्रमण
बाई जी मंदिर के पूर्व उपाध्यक्ष रामकुमार गुप्ता ने बताया कि पुराने समय में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को कंधों पर बैठाकर नगर भ्रमण कराया जाता था। हालांकि अब रथयात्रा के जरिए शहरवासियों को भगवान के दर्शन कराने की यह परंपरा जारी है।

15 दिन बाद होते हैं भगवान के दर्शन
मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ जी रथयात्रा से पहले 15 दिनों तक अस्वस्थ रहते हैं। इस दौरान मंदिर के पट बंद रहते हैं। 15 दिन बाद जब भगवान स्वस्थ होते हैं, तभी रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं।

Related Posts

पीएम मोदी से मिले गूगल सीईओ सुंदर पिचाई, AI सहयोग पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। Google के सीईओ Sundar Pichai ने 18 फरवरी को प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात की। पीएम मोदी ने मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि भारत में…

Continue reading
गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस में युवती से दुष्कर्म की कोशिश

गोरखपुर। गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस के एसी प्रथम श्रेणी कोच में एक 22 वर्षीय युवती से दुष्कर्म की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोपी टीटीई राहुल कुमार को रेलवे प्रशासन ने…

Continue reading