‘मुस्कान-साहिल को पछतावा नहीं, सुधार की संभावना भी नहीं’

नीला ड्रम कांड में 163 पन्नों के फैसले में जिला जज की टिप्पणी, सौरभ की हत्या के मामले में दोनों को सुनाई गई फांसी की सजा

मेरठ। चर्चित नीला ड्रम कांड में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाने से जुड़े फैसले में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने गंभीर टिप्पणियां की हैं। अपने 163 पन्नों के आदेश में उन्होंने कहा कि दोनों के व्यवहार से अपराध के प्रति पछतावे का अभाव दिखाई देता है। अदालत ने अपराध की प्रकृति और सबूत छिपाने के तरीके को समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला बताया।

‘अपराध के तरीके ने समाज को झकझोरा’

जिला जज ने आदेश में कहा कि अपने ही घर में पति की हत्या करना, शव के टुकड़े करना और सबूत छिपाने का तरीका बेहद गंभीर है। फैसले में मुस्कान और साहिल के व्यवहार को लेकर भी टिप्पणी की गई। अदालत के मुताबिक, दोनों के सुधरने और समाज की मुख्यधारा में लौटने की संभावना नहीं दिखती, इसलिए सजा में राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।

163 पन्नों के आदेश में दर्ज की गई टिप्पणी

अदालत ने सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता और उसके तरीके पर विचार किया। आदेश में कहा गया कि घटना की परिस्थितियां और शव को छिपाने के लिए अपनाया गया तरीका मामले को बेहद गंभीर बनाते हैं। इसी आधार पर अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई।

प्रेम विवाह के बाद फिर जुड़ा साहिल से रिश्ता

मामले के अनुसार, मुस्कान ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध अपने बचपन के प्रेमी सौरभ राजपूत से प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद उसका स्कूल के पुराने प्रेमी साहिल से फिर संबंध बन गया। अभियोजन के मामले के मुताबिक, इसी रिश्ते के चलते दोनों ने सौरभ की हत्या की और शव के टुकड़े करके नीले ड्रम में छिपा दिया था।

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