
लखनऊ। यूपी सरकार के स्वास्थ्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के 42वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को अक्सर कार्यक्रमों में अंत में बोलने का मौका मिलता है, ऐसे में उनके लिए कहने को कुछ नहीं बचता। आज उसी स्थिति में मैं खुद फंस गया हूं। उनका यह बयान समारोह के दौरान चर्चा का विषय बना रहा।
यूपी के सबसे प्रीमियर चिकित्सा संस्थान SGPGI ने रविवार को अपना 42वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर संस्थान परिसर में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक और स्वास्थ्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने शिरकत की।
प्रतिष्ठित व्याख्यान और सम्मान समारोह
स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित फाउंडेशन डे ओरेशन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत सेठ ने दिया। कार्यक्रम के दौरान बेस्ट रिसर्च पेपर सहित 40 से अधिक अवॉर्ड भी प्रदान किए गए।
1980 में रखी गई थी नींव
SGPGI की नींव 14 दिसंबर 1980 को तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी ने रखी थी। तीन वर्षों बाद संस्थान ने कार्य करना शुरू किया। हालांकि उत्तर प्रदेश विधानमंडल के अधिनियम के तहत संस्थान का स्थापना वर्ष 1983 माना जाता है।
2272 बेड, 350 से ज्यादा ICU बेड
संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आरके धीमन ने बताया कि SGPGI में वर्तमान में कुल 43 चिकित्सा संस्थान कार्यरत हैं। यहां 2272 बेड उपलब्ध हैं, जिनमें 350 से अधिक ICU बेड शामिल हैं। इसके अलावा 51 ऑपरेशन थिएटर संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि 60 अतिरिक्त बेड को मंजूरी मिल चुकी है, जिससे क्रिटिकल केयर मेडिसिन में बेड की संख्या बढ़कर 100 हो जाएगी।








