स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और अधिकारों के दुरुपयोग के आरोप एक बार फिर से गहराते नजर आ रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और डिप्टी सीएमओ इस बार विवादों के ऐसे घेरे में फंसते दिख रहे हैं, जहां से निकलना आसान नहीं होगा। एक ओर जहां अस्पताल संचालक ने सीएमओ पर पैसे की मांग करने का आरोप शपथपत्र के माध्यम से दर्ज कराया है, वहीं अब PCPNDT एक्ट के उल्लंघन का मामला भी तूल पकड़ता जा रहा है।
सीएमओ ने भेजे सम्मन, पर अधिकार पर उठे सवाल
जलालपुर निवासी सलिल यादव ने इस मामले में डीएम को भेजी गई शिकायत में स्पष्ट किया है कि PCPNDT एक्ट के तहत अल्ट्रासाउंड केंद्रों और अस्पतालों का पंजीकरण केवल जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) द्वारा किया जाता है। सीएमओ की भूमिका सिर्फ अभिलेखों के संधारण तक सीमित है।
इसके बावजूद सीएमओ ने 5 मई को जिले के कई अस्पताल संचालकों को सम्मन भेजे, जिसे लेकर अब कानूनी प्रश्न खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसा करने का अधिकार सीएमओ को है ही नहीं, और यह एक्ट के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।
डिप्टी सीएमओ की पत्नी का अस्पताल भी विवाद में
मामला यहीं नहीं रुका। डिप्टी सीएमओ की पत्नी के स्वामित्व वाले अस्पताल को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल, डिप्टी सीएमओ ही जिले में PCPNDT एक्ट के नोडल अधिकारी हैं और उनकी पत्नी का रामा मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल नामक निजी अस्पताल भी है। अब सवाल यह उठता है कि क्या वे स्वयं अपनी पत्नी के अस्पताल की जांच कर सकते हैं?
PCPNDT एक्ट की धारा के अनुसार, जहां हितों का टकराव हो, वहां संबंधित अधिकारी को पद से हट जाना चाहिए। लेकिन यहां ठीक उलटा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के भीतर यह टकराव अब बड़ी प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है।








