
- बेहोश “पर्यटकों” को स्ट्रेचर से अस्पताल पहुंचाया गया
- 45 डिग्री तापमान में बढ़ा डिहाइड्रेशन का खतरा
- सभी स्मारकों पर मेडिकल सुविधा देने की योजना
आगरा। तापमान के लगातार बढ़ने और लू के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को ताजमहल परिसर में मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस अभियान का उद्देश्य लू से बचाव के लिए तैनात एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करना और पर्यटकों को प्राथमिक उपचार की तत्काल सुविधा देना था। ड्रिल के दौरान “जागरूकता ही सुरक्षा है” का संदेश प्रमुखता से दिया गया।
सीआईएसएफ और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई
मॉक ड्रिल में सीआईएसएफ, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और स्वास्थ्य विभाग की टीमें शामिल रहीं। पर्यटकों के रूप में कुछ लोगों को गर्मी लगने से बेहोश दिखाया गया। सीआईएसएफ जवान तुरंत सक्रिय हुए और उन्हें व्हीलचेयर व स्ट्रेचर की मदद से सुरक्षित बाहर लाकर प्राथमिक उपचार दिया गया। कुछ “बेहोश” पर्यटकों को एंबुलेंस के ज़रिए अस्पताल पहुंचाया गया।
45 डिग्री तापमान में संगमरमर बना खतरा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि शहर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ताजमहल में सफेद संगमरमर की सतह गर्मी को और बढ़ा देती है, जिससे पर्यटकों को डिहाइड्रेशन और चक्कर आने की समस्या होती है। मॉक ड्रिल का मकसद इस तरह की आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया का अभ्यास करना था।
हर स्मारक पर मेडिकल सुविधा की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि ताजमहल समेत सभी प्रमुख स्मारकों पर मेडिकल सुविधा मुहैया कराई जाए। ताजमहल और आगरा किला जैसे पर्यटन स्थलों पर टूरिस्ट सुविधा केंद्रों को CPR, ड्रिप और अन्य प्राथमिक चिकित्सा उपकरणों से लैस किया जाएगा। सीआईएसएफ और एएसआई कर्मचारियों को भी इन उपकरणों का संचालन सिखाया जाएगा।








