- परिवार का कहना- कभी पढ़ाई का दबाव नहीं डाला
- 2024 में भी दी थी NEET की परीक्षा, रैंक नहीं आई थी अच्छी
- मां की बीमारी में संभाला घर, खुद बनाया था खाना
कानपुर। बर्रा-6 में रहने वाली 19 वर्षीय नुपुर वर्मा, जो NEET की तैयारी कर रही थी, नुपुर का सपना डॉक्टर बनने का था और इसके लिए वह रोज़ाना 6 से 7 घंटे मेहनत से पढ़ाई करती थी। उसकी स्टडी टेबल पर लिखा था – I Wanna Win, I Will Win – लेकिन आखिरी समय में उसने खुद को हार जाने दिया।
आखिरी नोट में थे कटे हुए शब्द, ‘Cry For Help’ थी आखिरी पुकार
फोरेंसिक टीम को मौके से नुपुर के हाथ से लिखे कुछ नोट्स मिले, जिसमें उसने 29 शब्दों को काटा था। एक अन्य पेज पर लिखा था – This is Cry For Help। मनोचिकित्सकों के मुताबिक यह “हेज़ीटेंट स्टेटमेंट” का संकेत है, यानी वह अपनी पीड़ा बयां करना चाहती थी लेकिन शब्दों को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं कर सकी।
पढ़ाई में गंभीर, जिम्मेदार बेटी थी नुपुर
पिता राम प्रकाश वर्मा, जो स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं, ने बताया कि नुपुर ने बीते सप्ताह मां के बीमार होने पर पूरा खाना खुद बनाया था। दादी की दवाई से लेकर घर के कामों तक में वह हाथ बंटाती थी। उन्होंने कभी बेटी पर पढ़ाई का दबाव नहीं डाला।
परीक्षा का तनाव बना कारण?
मनोचिकित्सकों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का डर, असफलता और समाज में स्वीकार्यता की चिंता, युवाओं को मानसिक रूप से तोड़ देती है। परिवारों को इस समय बच्चों को भरपूर समर्थन देना चाहिए। नुपुर ने 2024 में भी NEET की परीक्षा दी थी लेकिन रैंकिंग उम्मीद के अनुसार नहीं आई। इस बार अच्छे कॉलेज में दाखिले की तैयारी कर रही थी।
मां के साथ आखिरी बातचीत
घटना से कुछ घंटे पहले मां सुनीता ने नुपुर को कॉल किया था। उन्होंने खाने के लिए दो केले रखे थे, लेकिन नुपुर ने उन्हें नहीं खाया। भाई पार्थ के आने तक उसे खाना देने के लिए कहा गया था। लेकिन तब तक नुपुर यह कदम उठा चुकी थी।








