आगरा। खेरागढ़ के डूंगरवाला गांव में दशहरे के दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुआ हादसा अब भी लोगों के दिलों को दहला रहा है। 2 अक्टूबर को ऊटंगन नदी में हुए इस हादसे में 13 युवक डूब गए, जिनमें से 12 के शव बरामद किए गए जबकि एक युवक को बचा लिया गया। उसे फिलहाल अस्पताल में इलाज मिल रहा है।
घटना के बाद शुरू हुआ 127 घंटे लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं प्रतिदिन रेस्क्यू की प्रगति की जानकारी ली।
हादसे की शुरुआत: 25 फीट गहरे गड्ढे में फंस गए युवक
2 अक्टूबर दोपहर करीब 1:30 बजे प्रतिमा विसर्जन के दौरान गांव के युवक मूर्ति लेकर नदी में उतरे थे। अचानक 25 फीट गहरे गड्ढे में पैर फिसलने से एक युवक डूब गया। उसे बचाने के प्रयास में एक के बाद एक 13 लोग पानी में समा गए।
गांव के तैराक अमित राजपूत ने साहस दिखाते हुए दो युवकों को बाहर निकाला। तीसरे युवक विष्णु को ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बचा लिया गया। उसी दिन ओमपाल, गगन और मनोज के शव मिले।
एनडीआरएफ-एसडीआरएफ ने संभाली कमान, “ऑपरेशन ऊटंगन” शुरू
दूसरे दिन 3 अक्टूबर को प्रशासन ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू शुरू किया। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी और सेना की 411वीं पैराफील्ड कंपनी ने “ऑपरेशन ऊटंगन” के तहत मोर्चा संभाला। इस दौरान दो और शव — भगवती और अभिषेक उर्फ भेला — को नदी से निकाला गया।
कंप्रेशर तकनीक से मिली सफलता, बने अस्थायी बांध
शेष 7 युवकों की खोज में सिंचाई विभाग ने नदी का बहाव मोड़ने के लिए अस्थायी बांध बनाया।
5 अक्टूबर को कंप्रेशर तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे पानी की गहराई में दबे शवों को खोजने में मदद मिली।
इसके बाद
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5 अक्टूबर को करन का शव,
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6 अक्टूबर को वीनेश और ओकेश के शव,
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7 अक्टूबर को सचिन, दीपक, गजेन्द्र और हरेश के शव मिले।
शाम 6:10 बजे अंतिम शव बरामद होते ही छह दिन से चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त हुआ। रात में सभी मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया।
“मेरे जीवन का सबसे मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन था” — डीएम
जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने बताया कि यह उनके करियर का सबसे कठिन और भावनात्मक ऑपरेशन था। कई बार प्रयास विफल होने के बाद टीम ने नई तकनीक का प्रयोग किया। उन्होंने कहा,
“सीएम कार्यालय से लगातार संपर्क था। हर शव निकलने पर पूरी टीम की आंखें नम हो जाती थीं।”
प्रशासनिक अमला दिन-रात रहा सक्रिय
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार, डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी, एडीसीपी अतुल शर्मा, नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौके पर डटे रहे। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा।








