
अंबेडकरनगर। जिले के बाढ़ प्रभावित गन्ना क्षेत्रों में कीट व रोग का खतरा गंभीर होता जा रहा है। शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए विभागीय अमले को मैदान में उतार दिया है। अपर मुख्य सचिव, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग वीना कुमारी ने सभी केन मैनेजरों व फील्ड स्टाफ को प्रभावित इलाकों का नियमित भ्रमण कर तत्काल उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
सफेद मक्खी से पत्तियों का रंग बदल रहा, व्हाइट ग्रब जड़ों को कर रहा खत्म
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बाढ़ के पानी से नमी अधिक होने के कारण गन्ना फसल पर सफेद मक्खी, व्हाइट ग्रब और रूट रॉट का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। सफेद मक्खी के हमले से पत्तियों में लालिमा और पीला पन बढ़ रहा है, जिससे प्रकाश संश्लेषण की क्षमता प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर, व्हाइट ग्रब फसल की जड़ों को पूरी तरह नष्ट कर रहा है, जिससे गन्ने की वृद्धि रुक जाती है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है।
पेड़ी वाले खेत सर्वाधिक प्रभावित
जिले के गन्ना विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, पेड़ी (रैटून) फसल वाले खेतों में इन कीटों और रोग का असर अधिक देखा जा रहा है। लंबे समय तक पानी भराव की स्थिति में फसल की जड़ें कमजोर हो जाती हैं, जिससे कीट और फफूंद का संक्रमण तेजी से फैलता है।
उपचार की पूरी व्यवस्था
गन्ना विभाग ने प्रभावित खेतों में रूट रॉट के नियंत्रण के लिए थायोफनेट मिथाईल 70 डब्ल्यूपी और कार्बेन्डाजिम 50 डब्ल्यूपी का उपयोग शुरू कर दिया है। सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल का छिड़काव किया जा रहा है, जबकि व्हाइट ग्रब के लिए बायफेंथिन 10 ईसी और क्लोथियानिडीन 50 डब्ल्यूडीजी का प्रयोग किया जा रहा है।








