- फर्जी डिग्री के आधार पर 1997 में मिली थी नौकरी
- 28 वर्षों में ₹3.75 करोड़ से ज्यादा वेतन लिया
- संपूर्णानंद विश्वविद्यालय ने दस्तावेज़ों को फर्जी बताया
अंबेडकरनगर। बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर वर्षों तक नौकरी करने वाले प्रधानाध्यापक राकेश कुमार को आखिरकार बर्खास्त कर दिया गया है।
करीब 28 वर्षों तक फर्जी दस्तावेजों के सहारे सेवा देने वाले इस मृतक आश्रित को तीन करोड़ 75 लाख रुपए का वेतन अवैध रूप से दिया गया था। अब रिकवरी व आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आईजीआरएस से सामने आया मामला
यह पूरा मामला बसखारी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय हरनीडीह में तैनात प्रधानाध्यापक राकेश कुमार से जुड़ा है।आईजीआरएस के माध्यम से चंदन मौर्य द्वारा फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी पाने की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
जांच में यह पाया गया कि राकेश कुमार ने उत्तर मध्यमा और पूर्व मध्यमा की फर्जी डिग्रियों के आधार पर वर्ष 1997 में शिक्षक पद पर नियुक्ति ली थी।
संपूर्णानंद विश्वविद्यालय ने बताया अंकपत्र फर्जी
शिकायत के बाद, 15 जनवरी 2024 को राकेश कुमार से उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गईं।उन्होंने अंक पत्र को सत्य बताते हुए प्रमाण दिए, लेकिन शंका के आधार पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी को अंकपत्र भेजे गए।
विश्वविद्यालय से सत्यापन के बाद स्पष्ट हो गया कि प्रस्तुत दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं।
अंतिम सुनवाई में भी आरोप सही पाए गए
24 जून 2025 को अंतिम सुनवाई के दौरान राकेश कुमार पर लगे सभी आरोपों को सही पाया गया।
प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों के खुलासे के बाद स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन आरोपी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
इसके बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर रिकवरी और एफआईआर के आदेश जारी किए गए हैं।








