अम्बेडकरनगर। ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति, अम्बेडकरनगर ने मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर हो रहे कथित उत्पीड़न के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समन्वय समिति ने जिला पंचायत राज अधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए सहकारी समितियां एवं पंचायतें लेखा परीक्षा, उत्तर प्रदेश द्वारा की जा रही ऑडिट प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। समिति का कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल शासनादेशों के प्रतिकूल है, बल्कि ग्राम पंचायत सचिवों के साथ द्वेषपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा भी दे रही है।
लेखा परीक्षा दल पर लगाए गंभीर आरोप
समिति के अनुसार सहकारी समितियां एवं पंचायतें लेखा परीक्षा दल द्वारा मनरेगा व आवास योजनाओं की ऑडिट में व्यपहरण एवं वित्तीय अनियमितता का उल्लेख किया गया है, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 की सोशल ऑडिट पहले ही संपन्न हो चुकी है। सोशल ऑडिट में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई थी। ऐसे में पुनः की गई आपत्तियां न केवल शासनादेशों की अवहेलना हैं, बल्कि यह कार्यप्रणाली अधिकारियों की व्यक्तिगत दुर्भावना को भी उजागर करती है।
शासनादेश का हवाला देकर की कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में समिति ने स्पष्ट रूप से वर्ष 2023 एवं 2024 के शासनादेशों का हवाला देते हुए कहा कि जहां महालेखाकार उत्तर प्रदेश अथवा आंतरिक लेखा परीक्षा दल द्वारा ऑडिट की जा रही है, वहां सहकारी समितियों एवं पंचायतें लेखा परीक्षा विभाग द्वारा अलग से ऑडिट कराना नियम विरुद्ध है।
विशेष रूप से शासन के पत्र संख्या-1/389603/38-1-2023 दिनांक 18 सितम्बर 2023 तथा आयुक्त ग्राम्य विकास के पत्रांक 869 दिनांक 30 दिसम्बर 2024 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इन दस्तावेजों में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मनरेगा, आवास एवं आजीविका मिशन जैसी योजनाओं की ऑडिट महालेखाकार या आंतरिक लेखा परीक्षा दल द्वारा की जाएगी और अन्य माध्यमों से इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।








