राज ठाकरे का ‘महाराष्ट्र फर्स्ट’ कार्ड-क्या इस बार चलेगा

  • महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़? MNS-शिवसेना गठबंधन के संकेत
  • 2005 से अब तक: राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के रिश्तों का सफर
  • क्या भाजपा के लिए बड़ा झटका होगा MNS-शिवसेना गठबंधन?

मुंबई: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बयान में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के साथ हाथ मिलाने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता के हित में राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़ा जा सकता है।

“महाराष्ट्र बड़ा, हमारे झगड़े छोटे”

अभिनेता-निर्देशक महेश मांजरेकर के YouTube चैनल पर दिए इंटरव्यू में राज ठाकरे ने कहा, “हमारे बीच राजनीतिक मतभेद, विवाद और झगड़े हैं, लेकिन महाराष्ट्र के सामने ये सब छोटी चीजें हैं। मराठी अस्मिता के लिए हमें एकजुट होना चाहिए।” जब मांजरेकर ने उद्धव ठाकरे के साथ संभावित गठबंधन पर सवाल किया, तो राज ने जवाब दिया, “बड़े मकसद के आगे छोटी लड़ाइयां मायने नहीं रखतीं। यह निजी स्वार्थ का मामला नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की बड़ी तस्वीर है।”

उद्धव का जवाब: “मेरी तरफ से कभी झगड़ा नहीं था”

राज के बयान के बाद शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मेरी तरफ से तो कभी कोई झगड़ा ही नहीं था।” राजनीतिक हल्कों में इस बयान को दोनों नेताओं के बीच संभावित सुलाह का संकेत माना जा रहा है।

एकनाथ शिंदे गुट और भाजपा पर स्पष्ट रुख

  • शिंदे गुट पर: राज ठाकरे ने कहा कि एकनाथ शिंदे का शिवसेना से अलग होना राजनीति का अलग अध्याय है। उन्होंने याद दिलाया कि जब वे खुद शिवसेना छोड़कर MNS बनाई थी, तो कई नेता उनके साथ आना चाहते थे, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया था कि “बालासाहेब को छोड़कर किसी और के अधीन काम नहीं करूंगा।”
  • भाजपा के साथ गठबंधन? मांजरेकर के सवाल पर राज ने कहा, “मेरी विचारधारा भाजपा से मेल नहीं खाती, लेकिन राजनीति में कुछ भी हो सकता है। फिलहाल, मेरा फोकस महाराष्ट्र के हित में काम करना है।”

पृष्ठभूमि: 2005 का विभाजन और वर्तमान राजनीति

राज ठाकरे ने 2005 में शिवसेना छोड़ी थी, जब उद्धव का पार्टी में प्रभुत्व बढ़ने लगा था। उस समय बालासाहेब ठाकरे ने ‘सामना’ में लिखा था कि “शिवसना अजेय है और किसी बंटवारे की अफवाहों पर ध्यान न दें।” अब 2024 में, दोनों दलों का विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन खराब रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र में भाजपा और शिंदे गुट के मजबूत होने के बीच, MNS और शिवसेना (UBT) के बीच गठबंधन एक बड़ा राजनीतिक बदलाव ला सकता है।

आगे की राह: राज के इस बयान के बाद अब नजर उद्धव ठाकरे की ओर है कि वे इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में यह नया मोड़ चुनावी समीकरणों को बदल सकता है।

Related Posts

असम में सियासी बयानबाजी तेज, गोगोई ने सीएम सरमा पर साधा निशाना

गौरव गोगोई का सीएम हिमंता पर तीखा हमला ‘हिंदू सर्टिफिकेट’ टिप्पणी पर विवाद 22 फरवरी को भाजपा में शामिल होंगे भूपेन बोरा गुवाहाटी। Gaurav Gogoi ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस…

Continue reading
10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव

10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव 12 सीटें एनडीए, 25 विपक्ष के पास महाराष्ट्र में 7, तमिलनाडु में 6 सीटों पर मतदान नई दिल्ली। Election…

Continue reading