कृषि कानूनो की वापसी अहंकार की हार: अखिलेश

लखनऊ । तीन कृषि कानून की वापसी के फैसले को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अहंकार की हार बताते हुये समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में हार के डर से केन्द्र सरकार ने मजबूरी में यह कदम उठाया है।

अखिलेश ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चुनाव में हार के डर से कृषि कानून वापस लेने वाली सरकार से किसानो को सावधान रहना होगा। क्या गारंटी है कि चुनाव के बाद वह एक बार फिर से इन कानूनो काे अन्नदाताओं पर थोप दे। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज महोबा जा रहे है जहां भाजपा के कार्यकाल में किसानो ने सबसे ज्यादा आत्महत्यायें की।

उन्होने कहा कि सरकार को अब बताना होगा कि वह एमएसपी के लिये कानून कब बनेगा। प्रधानमंत्री कह रहे है कि उनकी सरकार ने मंडी के लिये पैसा दिया। क्या वह बतायेंगे कि किस मंडी में किसानाे से उनकी उपज की खरीद की जा रही है। मंडियों को कितना बजट दिया गया। खाद, डीएपी, कीटनाशक दवायें महंगी कर दी गयी। इस सरकार ने मंडियों को सुधारने का कोई इंतजाम नहीं किया। महोबा,बांदा,हमीरपुर,जालौन और झांसी में मंडियों में क्या सरकार ने पैसा दिया। लखनऊ में किसान बाजार क्यो बेच दिया हो। जो सरकार मंडियां खत्म कर रही हो उससे क्या उम्मीद की जा सकती है। इस सरकार को हटाये बगैर किसानो का भला नहीं हो सकता।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि काले कृषि कानूनों की वापसी अहंकार की हार है। यह किसानो और लोकतंत्र की जीत है। कृषि कानूनो की वापसी के लिये आंदोलन के दौरान सैकड़ों किसानो की जान चली गयी। इन किसानो की मौत के आगे भाजपा सरकार की झूठ की माफी नहीं चलेगी भाजपा सरकार को इस कृत्य के लिये सामूहिक इस्तीफा देना चाहिये और हमेशा के लिये राजनीति छोडने का वचन देना चाहिये वरना किसान सरकार को माफ करने के बजाय साफ करने का काम चुनाव में करेगा। ।

उन्होने कहा कि वास्तव में चुनाव पास आने पर सरकार डर गयी है और वोट के लिये कानून वापस लेना उसकी मजबूरी हो गयी। उद्योगपतियों और पूंजीपतियों का हित चाहने वाली भाजप सरकार की नजर में किसान का कोई सम्मान नहीं है। इसका उदाहरण है कि लखीमपुर में किसानो की हत्या जिस मंत्री के बेटे ने की, उस मंत्री का आज तक इस्तीफा नहीं लिया गया, वह अभी भी मंत्रिमंडल में है।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि पूर्वांचल के उनके दौरे में किसान और जनता का सैलाब सड़कों पर दिखायी पड़ा जिससे लखनऊ ही नहीं बल्कि दिल्ली की सरकार भी हिल गयी और उसने हार के डर से कृषि कानून वापस लिये। उन्होने कहा कि यह पहला गलत फैसला नहीं था जिसमें किसानो की जान गयी। इससे पहले नोटबंदी के दौरान भी कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पडा था।

अखिलेश ने कहा कि भाजपा सरकार के लिये किसान का सम्मान प्राथमिकता नहीं है बल्कि उनका वोट प्राथमिकता है। उन्होने सवाल किया कि क्या भाजपा किसानो की जान वापस ला सकती है। क्या सरकार किसानो से माफी मांगेगी। एमएसपी कब लागू होगी ये भी सरकार बताये। खाद कब मिलेगी। डीएपी कब मिलेगी। किसान आंदोलन के मामले में सबसे ज्यादा मुकदमे सपा कार्यकर्ताओं पर हुये हैं।

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