देश : वैश्विक ऊर्जा संकट और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Sagar Adani ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय ही तय करेगा कि यह भू-राजनीतिक स्थिति ऊर्जा बाजार को स्थिर करेगी या अस्थिर।
उन्होंने खासतौर पर यूएई और ओपेक देशों के बदलते समीकरणों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाक्रमों का असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ी चिंता
सागर अदाणी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए चुनौती बन सकता है। खासकर Strait of Hormuz जैसी अहम शिपिंग लेन पर खतरे ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
उन्होंने इसे ‘हार-हार’ की स्थिति बताते हुए कहा कि इस तनाव से न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
भारत की ऊर्जा रणनीति पर भरोसा
Adani Group के कार्यकारी निदेशक ने कहा कि भारत ने इस संकट से निपटने के लिए तेज और प्रभावी कदम उठाए हैं।
उनके अनुसार, भारत की ऊर्जा नीति का मुख्य लक्ष्य आत्मनिर्भरता और स्थिरता है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
ग्रीन एनर्जी में बड़ा निवेश
सागर अदाणी ने बताया कि समूह ने भारत में ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए करीब 100 बिलियन डॉलर निवेश की योजना बनाई है।
इसमें सौर, पवन और अन्य ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं के साथ-साथ थर्मल और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030 तक 50,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर कदम
उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी ऊर्जा रेजिलिएंस है। वर्तमान में देश के पास करीब 20,000 मेगावाट ग्रीन एनर्जी क्षमता है, जिसे अगले दशक में कई गुना बढ़ाने की योजना है।









