
कांची मठ बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सोमवार को जलालपुर तहसील क्षेत्र के सुरहुरपुर गांव पहुंचे। उन्होंने अपने ब्रह्मलीन गुरु स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती की जन्मस्थली पर श्रद्धापूर्वक नमन किया और लगभग एक घंटे तक वहां मौजूद रहे।
इस अवसर पर शंकराचार्य ने गुरु से जुड़ी स्मृतियों को साझा किया और सभी से उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सनातन धर्म और हिंदुत्व का संदेश फैलाया। उनके प्रयासों ने समाज को जागृत करने और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जन्मस्थल को भव्य रूप देने की पहल
शंकराचार्य ने कहा कि गुरु की जन्मस्थली को भव्य स्वरूप देना पुण्य का कार्य है। उन्होंने इस निर्माण में स्वयं योगदान देने और अन्य श्रद्धालुओं के सहयोग को भी आमंत्रित किया। उनका यह संदेश समाज में संस्कृति और धार्मिक चेतना को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
ग्रामीणों ने किया स्वागत
सुरहुरपुर पहुंचने पर ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा और शंखनाद के साथ शंकराचार्य का स्वागत किया। जन्मस्थल पर पहुंचकर उन्होंने गुरु के चित्र पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर आयोजक महेंद्र कुमार मिश्रा और अधिवक्ता राकेश कुमार पांडेय ने शंकराचार्य को गुरु से जुड़ी विभिन्न जानकारियां साझा कीं। इसके अलावा, मालीपुर थाना अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार मौर्य, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा, प्रधान मनोज तिवारी, वीरेंद्र कुमार यादव, बंगाली पांडेय, रवि सोनी, दिनेश जायसवाल और विजय कुमार मौर्य सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। उन्होंने शंकराचार्य के संदेश को महत्वपूर्ण बताया और इसे युवाओं तक पहुंचाने का संकल्प लिया।








