- जिले में 2898 टीबी मरीज उपचाराधीन
- जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से सरकारी अभियान को झटका
- डीएम, सीडीओ, सीएमओ ने मरीजों को गोद लिया
अम्बेडकरनगर: जिले में चल रहे “टीबी मुक्त अभियान” में जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने सरकारी प्रयासों को झटका दिया है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित इस अभियान के तहत सांसद, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को टीबी मरीजों को गोद लेकर आर्थिक और मानसिक सहयोग देना अनिवार्य है। लेकिन अम्बेडकरनगर में इस पहल के प्रति जनप्रतिनिधि पूरी तरह से खामोश हैं।
वहीं प्रशासनिक अधिकारी, डॉक्टर, कर्मचारी, एनजीओ और व्यापारी ही मरीजों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए आगे आ रहे हैं।
2898 मरीजों के इलाज के बीच जनप्रतिनिधि क्यों खामोश?
जिले में वर्तमान में 2898 टीबी मरीज उपचाराधीन हैं, जिन्हें निरंतर सहायता और पोषण की आवश्यकता है। सरकार की योजना के तहत टीबी मरीजों को गोद लेने पर आर्थिक सहायता के साथ-साथ आयकर में छूट जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।
फिर भी, अम्बेडकरनगर में एक भी विधायक या सांसद ने अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की है। यह तथ्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और जनता के बीच चिंता का विषय बना हुआ है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने ली जिम्मेदारी
जिला प्रशासन ने टीबी मरीजों के सहयोग में कदम बढ़ाते हुए डीएम ने तीन, सीडीओ ने दो, सीएमओ ने चार और जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामानंद सिद्धार्थ ने आठ मरीजों को गोद लिया है। ये अधिकारी मरीजों को पोषण, इलाज और वित्तीय मदद प्रदान करने के साथ-साथ मानसिक सहारा भी दे रहे हैं।
डॉ. रामानंद सिद्धार्थ ने कहा, “सरकार की बार-बार की अपील के बावजूद जनप्रतिनिधि इस अभियान में शामिल नहीं हो रहे हैं। यह न केवल स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए चिंता का विषय है, बल्कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाता है।”








