- सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन के आदेश से किया इनकार
- मुर्शिदाबाद हिंसा पर दूसरी याचिका की सुनवाई
- हाईकोर्ट का केंद्रीय बलों की तैनाती पर आदेश सुरक्षित
कोर्ट की बेंच ने इस पर कहा कि वे राष्ट्रपति को आदेश नहीं दे सकते और दूसरों के अधिकार क्षेत्र में दखलंदाजी के आरोपों से बचना होगा। इस बीच, उच्चतम न्यायालय में दूसरी याचिका की सुनवाई भी हुई, जिसमें हिंसा के कारण लोगों के पलायन का मुद्दा उठाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बंगाल में राष्ट्रपति शासन और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करने की याचिका पर कोई आदेश जारी करने से मना कर दिया। याचिकाकर्ता ने मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इस पर कोई फैसला नहीं दिया। वहीं, दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने हिंसा प्रभावित इलाकों में केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखने पर विचार किया और वहां के दौरे के लिए पैनल का गठन करने का सुझाव दिया।
इसके साथ ही, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की टीम मुर्शिदाबाद जिले का दौरा कर रही है, ताकि दंगा प्रभावित इलाकों का जायजा लिया जा सके। इस बीच, वक्फ कानून के विरोध में ‘वक्फ बचाव अभियान’ भी चल रहा है, जिसका पहला चरण 11 अप्रैल से शुरू हो चुका है।








