
- अमेरिका से भारत तक- राणा के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया और उसकी कानूनी चुनौतियाँ।
NIA की रणनीति –राणा से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी और आगामी जांच की दिशा।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग- भारत-अमेरिका के आतंकवाद विरोधी संबंधों में राणा का प्रत्यर्पण एक मील का पत्थर।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 2008 के मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा से शनिवार को दूसरे दिन भी पूछताछ की। पूछताछ में राणा ने लश्कर-ए-तैयबा के साजिद मीर से निरंतर संपर्क और ‘दुबई मैन’ नामक व्यक्ति का उल्लेख किया, जिसे हमले की योजना की पूरी जानकारी थी। NIA को संदेह है कि यह व्यक्ति पाकिस्तान और दुबई के बीच नेटवर्क का संचालन करता था, और हमलों की वित्तीय और लॉजिस्टिक सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। राणा का पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से भी करीबी संबंध था, और उसे पाकिस्तानी सेना की वर्दी से विशेष लगाव था।
NIA ने राणा को 18 दिनों की कस्टडी में लिया है, इस दौरान उससे नियमित पूछताछ की जाएगी, और पूछताछ के दौरान एक डायरी तैयार की जाएगी, जिसे बाद में डिस्क्लोजर स्टेटमेंट में शामिल किया जाएगा। राणा को 10 अप्रैल को विशेष विमान से अमेरिका से भारत लाया गया था। उसे तिहाड़ जेल के उच्च सुरक्षा वार्ड में रखा जाएगा, हालांकि उसे किस वार्ड में रखा जाएगा, इसकी जानकारी अभी साझा नहीं की गई है।
तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है, जो पाकिस्तान की सेना में डॉक्टर रह चुका है। वह 1997 में कनाडा गया और वहां इमिग्रेशन सर्विसेज का व्यवसाय शुरू किया। उसके खिलाफ पहले भी कई आरोप हैं, जिनमें 2011 में डेनिश अखबार पर हमले की साजिश रचना शामिल है, जिस पर पैगंबर मोहम्मद के विवादास्पद कार्टून प्रकाशित हुए थे। अक्टूबर 2009 में उसे शिकागो में गिरफ्तार किया गया था और 2013 में उसे 14 साल की सजा सुनाई गई थी।
अमेरिका ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण में भारत का सहयोग किया है, और अब वह भारत में न्यायिक प्रक्रिया का सामना करेगा। एनआईए और खुफिया एजेंसियां उसकी भूमिका की जांच कर रही हैं, ताकि मुंबई हमलों से संबंधित सभी पहलुओं का पर्दाफाश किया जा सके।








