
महापौर के निर्णय पर खड़े हुए सवाल, बीजेपी पार्षद भी नाराज
राजनाथ सिंह और ब्रजेश पाठक की मध्यस्थता के बाद भी नहीं थमा विवाद
सदन बैठक से पहले पार्षदों की एकजुटता बढ़ी, विरोध की रणनीति तैयार
लखनऊ। नगर निगम में पार्षद निधि को लेकर खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही। कार्यकारिणी बैठक में पार्षद निधि बढ़ाने के फैसले के बाद अब उसे निर्धारित मदों में खर्च करने की शर्तों से नाराजगी गहरा गई है। पार्षदों ने इसे लेकर पार्टी के महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी और भाजपा नेता नीरज सिंह से शिकायत की है।
पार्षदों का कहना है कि 24 मार्च की कार्यकारिणी बैठक में निधि बढ़ाने का फैसला हुआ था, लेकिन अब उसे कैपिंग के जरिए सीमित कर दिया गया है। पार्षद चाहते हैं कि निधि को वार्ड की जरूरतों के अनुसार खर्च करने की छूट पहले जैसी बनी रहे।
सदन बैठक से पहले बढ़ा विवाद
सदन की बैठक पहले 7, 9 और 12 अप्रैल को होने की अटकलें थीं, लेकिन अब 15 अप्रैल को बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। बैठक से पहले ही पार्षदों की नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कैसे हुआ कैपिंग का विरोध
बढ़ी हुई 60 लाख की निधि को 7 अलग-अलग मदों में बांट दिया गया है, जिसमें सड़क पैचवर्क, फॉगिंग, ठेले की मरम्मत, कफन और ई-रिक्शा की खरीद जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। पार्षदों का कहना है कि यह कैपिंग उन्हें अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार काम करने से रोकती है।
राजनाथ सिंह और ब्रजेश पाठक ने की मध्यस्थता
लगातार बढ़ते विवाद को देखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 48 घंटे में हल निकालने के निर्देश दिए थे, जबकि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी बीच-बचाव में शामिल हुए। हालांकि विवाद थमने के बजाय और गहराता जा रहा है।
सपा पार्षदों की बैठक से नया मोड़
महापौर के कैंप कार्यालय में सपा पार्षदों की बैठक को लेकर भी बीजेपी पार्षदों में रोष है। पार्षदों का आरोप है कि महापौर विपक्षी दल के साथ बैठकर पक्षपात कर रही हैं। दूसरी ओर सपा पार्षदों का कहना है कि वे सदन की बैठक बुलाने की मांग को लेकर पहुंचे थे।








