
नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को देश को वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद से मुक्त करने के मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई। यह बहस उस समय हो रही है, जब सरकार द्वारा तय की गई 31 मार्च 2026 की समय सीमा समाप्त होने में केवल एक दिन शेष है।
यह चर्चा नियम 193 के तहत की गई, जिसके अंतर्गत अल्पकालिक बहस के बाद सरकार को जवाब देना अनिवार्य होता है।
सरकार के प्रयासों का बचाव
बहस की शुरुआत श्रीकांत शिंदे ने की। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले नक्सलवाद को खत्म करना असंभव मानते थे, उन्हें अब सरकार के प्रयासों से करारा जवाब मिला है। उन्होंने गृह मंत्रालय द्वारा तय समय सीमा और उसके तहत किए गए प्रयासों की सराहना की।
विपक्ष ने उठाए सवाल
वहीं महुआ मोइत्रा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश इस समय “राइट विंग आतंकवाद” की समस्या से जूझ रहा है। उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ समय के लिए माहौल गरमा गया।
अमित शाह देंगे जवाब
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार ने सदन में वादा किया था कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त कर दिया जाएगा और आज गृह मंत्री अमित शाह इस पर विस्तृत जवाब देंगे।
गौरतलब है कि अमित शाह कई बार यह दोहरा चुके हैं कि सरकार का लक्ष्य तय समय सीमा के भीतर देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना है।
IBC संशोधन बिल 2025 भी पास
इसी दौरान लोकसभा में इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) बिल, 2025 को भी पारित कर दिया गया।
वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिल पेश करते हुए कहा कि IBC देश के बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत करने में एक अहम भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस कानून के जरिए नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) की वसूली में सुधार हुआ है और दिवालिया प्रक्रिया से बाहर आने वाली कंपनियों के प्रदर्शन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में भी सकारात्मक बदलाव देखा गया है।
राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर एक साथ चर्चा
लोकसभा में एक ओर जहां नक्सलवाद जैसे गंभीर सुरक्षा मुद्दे पर बहस हुई, वहीं दूसरी ओर आर्थिक सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक को भी पारित किया गया। इससे साफ है कि संसद में सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों ही प्रमुख मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है।







