लखनऊ। राजधानी पुलिस ने एक अंतरराज्यीय मानव तस्कर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके चंगुल से दो नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान शहडोल, मध्यप्रदेश निवासी संतोष साहू उर्फ डब्ल्यू और अजमेर, राजस्थान निवासी मनीष भंडारी के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, यह गैंग नाबालिग लड़कियों को बहलाकर उनका माइंड वॉश करता था और फिर उन्हें राजस्थान व हरियाणा में 50 हजार रुपए में बेच देता था। गिरोह अब तक करीब 15 लड़कियों की तस्करी कर चुका है। फिलहाल पुलिस इनके नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
16 साल की लड़की से हुआ खुलासा
DCP साउथ निपुण अग्रवाल ने बताया कि 30 जून को कृष्णानगर इलाके से एक 16 वर्षीय लड़की अचानक लापता हो गई थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस की 6 टीमें लगाई गईं। लड़की को मानक नगर रेलवे स्टेशन से बरामद कर लिया गया, लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गए थे।
पीड़िता के बयान पर आरोपियों की गिरफ्तारी
पूछताछ में नाबालिग ने बताया कि संतोष और मनीष उसे चारबाग रेलवे स्टेशन से अपने साथ ले गए थे और फिर राजस्थान में 50 हजार में बेच दिया गया। इसी आधार पर पुलिस ने 10 जुलाई को दोनों आरोपियों को धर दबोचा।
संतोष और मनीष का गहरा नेटवर्क
जांच में पता चला कि संतोष और मनीष की पहचान 2012 में हुई थी। संतोष अब तक 15 से ज्यादा नाबालिगों को तस्करी के लिए फंसा चुका है, जिन्हें मनीष खरीद कर आगे बेच देता था। मनीष ने पुलिस को बताया कि वह इन लड़कियों को शादी के नाम पर अन्य लोगों को बेचता था।
धार्मिक आस्था का फायदा उठाया
DCP ने बताया कि पीड़िता संत प्रेमानंद की भक्त है और मथुरा जाना चाहती थी। इसी बात का फायदा उठाकर संतोष ने उसे बहला-फुसलाकर लखनऊ बुलाया और फिर कानपुर, प्रयागराज, शहडोल होते हुए कटनी (मप्र) में अपने परिचित के घर रखा। 6 जुलाई को उसने लड़की को मनीष भंडारी के पास 50 हजार में बेच दिया।
विरोध करने पर लौटाई गई पीड़िता
जब मनीष भंडारी पीड़िता को जबरन अपने साथ ले जाने लगा, तो उसने रो-रोकर विरोध किया। इसके चलते मनीष ने उसे वापस कर दिया और संतोष से 5000 रुपए काटकर 45000 रुपए वापस ले लिए।








