
- भारत के सांस्कृतिक धरोहर को मिली वैश्विक मान्यता
गीता और नाट्यशास्त्र के यूनेस्को में समावेश का ऐतिहासिक महत्व
- मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर की पहल: भारत की महत्वपूर्ण कृतियाँ
नई दिल्ली। भारत के दो महत्वपूर्ण ग्रंथ, श्रीमद भगवत गीता और भरत मुनि का नाट्यशास्त्र, अब यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल हो गए हैं। इस सम्मान के साथ, अब भारत के कुल 14 अभिलेख इस प्रतिष्ठित रजिस्टर में दर्ज हो चुके हैं। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने X (पूर्व में ट्विटर) पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए इसे भारत के शाश्वत ज्ञान और कलात्मक धरोहर का वैश्विक सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि ये रचनाएं केवल साहित्यिक खजाने का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि हमारे सोचने, महसूस करने और अभिव्यक्त करने के तरीके को समृद्ध करने वाले दार्शनिक आधार हैं।
यह ऐतिहासिक घटना 18 अप्रैल, यानी वर्ल्ड हेरिटेज डे के दिन हुई, जो भारत के लिए गर्व का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया कि यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में गीता और नाट्यशास्त्र का समावेश हमारे देश की शाश्वत संस्कृति और ज्ञान की वैश्विक स्वीकृति है। उन्होंने इसे दुनिया भर के भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि ये ग्रंथ सदियों से सभ्यता और चेतना को पोषित कर रहे हैं, और उनकी अंतर्दृष्टि दुनिया को प्रेरित करती रहती है।
मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर की शुरुआत
यूनेस्को ने 1992 में मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य दुनिया भर के महत्वपूर्ण दस्तावेजों, पांडुलिपियों, दुर्लभ पुस्तकों, चित्रों, फिल्में और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स को पहचान देना और उनकी संरक्षण सुनिश्चित करना है, जिनका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व हो।








