पशु चिकित्सा अधिकारी और ग्राम पंचायत सचिव की क्या भूमिका

  • गोवंश आश्रय स्थल पर कितनी संख्या में पशु संरक्षित हैं
  • भूसा और हरे चारे की उपलब्धता की क्या स्थिति है
  • ईयर टैगिंग से कैसे सुनिश्चित होती है गोवंश की देखभाल

अम्बेडकरनगर। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला के साथ तहसील क्षेत्र के ग्राम प्रतापपुर चमुर्खा स्थित अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद 88 गोवंशों (49 नर व 39 मादा) की देखभाल और प्रबंधन व्यवस्था की जांच की।

मूलभूत सुविधाएं संतोषजनक, ईयर टैगिंग पूर्ण

जिलाधिकारी ने आश्रय स्थल पर भूसा, हरा चारा, पशु आहार और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था को संतोषजनक पाया। सभी गोवंशों की ईयर टैगिंग पूरी तरह से की गई थी, जिससे उनकी निगरानी और प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

कमजोर गोवंशों के लिए विशेष देखभाल के निर्देश

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि नियमित हरे चारे की आपूर्ति के लिए दो बीघा भूमि पर चारे की बुवाई कराई गई है। निरीक्षण में कोई गोवंश बीमार नहीं पाया गया, लेकिन कुछ शारीरिक रूप से कमजोर थे। इस पर जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत सचिव और पशु चिकित्सा अधिकारी को कमजोर गोवंशों की विशेष देखभाल और बेहतर आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

अलग-अलग वर्गों के लिए अलग व्यवस्था

जिलाधिकारी ने नर, मादा, कमजोर और छोटे गोवंशों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया, ताकि उनकी देखभाल और स्वास्थ्य प्रबंधन बेहतर हो सके। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, खंड विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत सचिव को समन्वय बनाकर काम करने को कहा।

गोसेवा का संदेश

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी ने गोवंशों को केला और गुड़ खिलाकर गोसेवा का संदेश दिया। इस मौके पर जिला पंचायत राज अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव भी मौजूद रहे।

Back to top button