“एक राष्ट्र, एक चुनाव” लागू करने से आम जनता को क्या मिलेगा

  • महिला सम्मेलन में “एक राष्ट्र, एक चुनाव” पर जोर
  • भाजपा का जनपद स्तर पर चुनाव सुधार का प्रयास
  • स्वामी विवेकानंद कॉलेज में महिलाओं ने जताई अपनी सहभागिता

अम्बेडकरनगर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तत्वावधान में “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की अवधारणा को लेकर जनपद में चल रहे जागरूकता अभियान के तहत गुरुवार को स्वामी विवेकानंद पीजी कॉलेज में एक महिला सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बार-बार होने वाले चुनावों से होने वाले आर्थिक और प्रशासनिक नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक करना था।

प्रमुख अतिथियों ने रखे अपने विचार

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष कपिल देव वर्मा ने कहा कि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की व्यवस्था लागू होने से देश के विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी। उन्होंने कहा, “चुनावी प्रक्रिया में बार-बार लगने वाले समय, धन और संसाधनों की बर्बादी को रोका जा सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह अवधारणा देशहित में एक बड़ा कदम है।”

इस अवसर पर चीफ प्रॉक्टर मनीराम और प्राचार्य डॉ. ध्यान चंद वर्मा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संयोजन जवाहर लाल मौर्य ने किया, जबकि संचालन भाजपा प्रवक्ता मो. रिजवान अहमद ने किया।

अन्य विधानसभाओं में भी होंगे ऐसे कार्यक्रम

भाजपा जिला मीडिया प्रभारी बाल्मीकि उपाध्याय ने बताया कि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” के समर्थन में जनपद की अन्य विधानसभाओं में भी ऐसे सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में प्रवक्ता मो. खालिद के साथ-साथ सैकड़ों महिलाओं और बालिकाओं ने भाग लिया।

क्या है “एक राष्ट्र, एक चुनाव”?

इस अवधारणा के तहत लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होगा।

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