क्यों बिना विशेषज्ञों के संचालित हो रहे हैं निजी चिकित्सा केंद्र?

  • जिले में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की सख्त कार्रवाई
  • विशेषज्ञों के बिना संचालित केंद्रों की जांच में स्वास्थ्य विभाग की तत्परता
  • चिकित्सा रिपोर्ट की प्रमाणिकता पर सवाल, निरीक्षण अभियान स्थगित

अम्बेडकरनगर । जनपद के शहरी और ग्रामीण इलाकों में संचालित कई निजी अस्पताल, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी केंद्र बिना निर्धारित मानकों और विशेषज्ञ कर्मियों के चलाए जा रहे हैं। इन संस्थानों द्वारा चिकित्सा नियमों और डायग्नोस्टिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं, जिससे जांच रिपोर्ट्स की प्रामाणिकता और मरीजों के इलाज पर सवाल उठ रहे हैं।

डिजिटल हस्ताक्षर से जारी हो रही फर्जी रिपोर्ट्स

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कई निजी पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट मौजूद नहीं होते, लेकिन उनके डिजिटल हस्ताक्षर स्कैन करके रिपोर्ट जारी की जा रही हैं। ये रिपोर्ट्स अप्रशिक्षित तकनीकी सहायकों द्वारा तैयार की जा रही हैं, जिससे जांच की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में है। डॉक्टर इन्हीं गलत रिपोर्ट्स के आधार पर मरीजों का इलाज शुरू कर रहे हैं, जिससे मरीजों को अनावश्यक दवाओं का खर्च और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

22 संस्थानों पर कार्रवाई, लेकिन अभियान ठंडा

पिछले पांच महीनों में जिले में हुए औचक निरीक्षण और प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान 22 निजी चिकित्सा संस्थानों को नियमों के विरुद्ध संचालन के आरोप में सील किया गया था। इसके बाद अन्य जांच केंद्रों की जांच के लिए एक अभियान शुरू करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।

सीएमओ ने क्या कहा?

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संजय कुमार शैवाल ने बताया कि कुछ अल्ट्रासाउंड केंद्रों के खिलाफ रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति और अवैध संचालन की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना नामित विशेषज्ञ के कोई भी केंद्र संचालित नहीं हो सकता। स्वास्थ्य विभाग जल्द ही प्रवर्तन टीम बनाकर ऐसे सभी केंद्रों की जांच कराएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

आगे की कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी निजी चिकित्सा संस्थानों और डायग्नोस्टिक केंद्रों की व्यापक जांच का संकल्प लिया है। साथ ही, मरीजों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना विभाग को दें ताकि ऐसे अवैध केंद्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

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