- क्या ‘द रॉयल्स’ वाकई रॉयल है या सिर्फ दिखावा
- जब महाराजा ही बन गया आम आदमी, तब क्या हुआ
- ईशान-भूमि की जोड़ी क्यों नहीं जमी ‘द रॉयल्स’ में
नई दिल्ली। सीरीज की शुरुआत एम्बिशियस बिजनेसवुमन सोफिया शेखर (भूमि पेडनेकर) से होती है, जो अपनी कंपनी ‘रॉयल एंड बीबी’ को टॉप पर लाने के लिए एक योजना बनाती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात महाराजा अविराज (ईशान खट्टर) से होती है, जो शाही अंदाज़ में घुटने तक शर्टलेस और शराब के पैग़ के साथ नज़र आते हैं।
कहानी दो पटरियों पर चलती है:
- सोफिया का बिजनेस प्लान – वह रॉयल परिवारों के साथ आम लोगों को जोड़ने वाला एक टूरिज़म प्रोजेक्ट शुरू करती है।
- मोरपुर रॉयल फैमिली का संकट – महाराजा के पिता की मौत के बाद पता चलता है कि वे कर्ज़ में डूबे हुए हैं और परिवार की शान बचाने के लिए अब उन्हें सोफिया के प्रोजेक्ट से पैसे कमाने होंगे।
इस बीच, सोफिया और अविराज के बीच रोमांस और झगड़े की एक उलझी हुई रेल चलती है, जो सीरीज को आगे बढ़ाती है।
क्या सीरीज देखने लायक है?
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कमजोर स्क्रिप्ट: कहानी में कई प्लॉट होल्स हैं और किरदारों के मोटिवेशन स्पष्ट नहीं हैं।
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ओवरएक्टिंग: साक्षी तंवर (महारानी) और ईशान खट्टर के परफॉरमेंस में ज़बरदस्ती का नाटकीयपन दिखता है।
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बेकार कॉमेडी: जीनत अमान जैसी अभिनेत्री को फालतू के कॉमिक रोल में फंसा दिया गया है।
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शाही ग्लैमर के नाम पर फूहड़पन: राजा-महाराजाओं का चरित्र चित्रण अविश्वसनीय और क्लिचे लगता है।
फाइनल वर्ड:
अगर आपको रॉयल ड्रामा और रोमांटिक टसल पसंद है, तो एक बार देख सकते हैं। लेकिन अगर आप टाइट स्टोरी और बेहतरीन एक्टिंग की उम्मीद कर रहे हैं, तो ‘द रॉयल्स’ आपके लिए नहीं है।








