- प्रीति का संघर्ष- कागजों पर मृत घोषित होने के बाद न्याय की तलाश
- नौकरशाही की लापरवाही- प्रीति को न्याय दिलाने में आठ महीने का संघर्ष
- महिला की पेंशन पर प्रशासनिक गलती का भारी असर
अम्बेडकरनगर। जिले में नौकरशाही की लापरवाही ने एक बार फिर सिस्टम की खामियों को उजागर किया है। रामनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत महेशपुर मंडप की निवासी प्रीति सिंह को ग्राम पंचायत अधिकारी (जीपीओ) ने कागजों पर मृत घोषित कर दिया, जिससे उनकी विधवा पेंशन रुक गई। आठ महीने के संघर्ष के बाद अब उन्हें न्याय मिला है और दोषी अधिकारी को निलंबित किया गया है।
क्या हुआ था?
प्रीति के पति प्रदीप कुमार सिंह की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी। पति की मौत के बाद प्रीति ने विधवा पेंशन के लिए आवेदन किया, जो मंजूर हो गया और उन्हें पेंशन मिलने लगी। लेकिन 2024 में लाभार्थियों के सत्यापन के दौरान ग्राम पंचायत अधिकारी अनोद कुमार ने बिना कोई पुष्टि किए प्रीति को “मृत” घोषित कर दिया। इसकी वजह से उनकी पेंशन रोक दी गई।
संघर्ष के बाद मिला न्याय
जब कई महीनों तक पेंशन नहीं मिली, तो प्रीति ने पता लगाया तो पता चला कि उन्हें अधिकारिक रिकॉर्ड में मृत दिखाया जा रहा है। उन्होंने ग्राम सचिव से लेकर उच्च अधिकारियों तक शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार, उन्होंने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला से शुक्रवार को मुलाकात कर मामला रखा।
जिलाधिकारी ने डीपीआरओ को जांच का निर्देश दिया। जांच में जीपीओ अनोद कुमार की लापरवाही सामने आई। डीपीआरओ अवनीश कुमार श्रीवास्तव ने उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया और कार्यालय में तैनात कर दिया।
लाल बिहारी ‘मृतक’ जैसा मामला
यह मामला लाल बिहारी ‘मृतक’ की याद दिलाता है, जिन्होंने सालों तक लड़ाई लड़ी क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत बताया गया था। प्रीति का केस भी दिखाता है कि सिस्टम की गलती से आम लोगों को कितनी मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं।
डीपीआरओ ने कहा कि “ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।”
निष्कर्ष:
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जीपीओ की गलती से प्रीति की पेंशन रुकी।
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8 महीने के संघर्ष के बाद जिलाधिकारी ने कार्रवाई की।
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दोषी अधिकारी निलंबित, भविष्य में सख्त निगरानी का वादा।








