- झेलम नदी के किनारे से पकड़ा गया अब्दुल मजीद – क्या था उसका मिशन
- भारतीय ड्रोन और कैश की बरामदगी – साजिश या सबूत
- भारतीय सेना के अफसरों से अब्दुल का कनेक्शन – कितना सच, कितना भ्रम
इस्लामाबाद। पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में भारत पर आतंकवाद को प्रायोजित करने का गंभीर आरोप लगाया। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने दावा किया कि उनकी सेना ने 25 अप्रैल को झेलम नदी के पास एक आतंकी संदिग्ध अब्दुल मजीद को गिरफ्तार किया है, जिसे भारत ने प्रशिक्षित किया था।
क्या-क्या बरामद हुआ?
शरीफ के मुताबिक, अब्दुल के पास से निम्न सामग्री जब्त की गई:
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2.5 किलोग्राम का IED (विस्फोटक यंत्र)
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2 मोबाइल फोन
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70,000 पाकिस्तानी रुपये (नकद)
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एक भारतीय ड्रोन (घर से बरामद)
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10 लाख पाकिस्तानी रुपये (घर से मिला नकद)
“भारतीय अधिकारियों से संपर्क” का दावा
शरीफ ने एक स्क्रीनशॉट दिखाकर दावा किया कि अब्दुल “सिकंदर” नाम के एक भारतीय सैन्य अधिकारी के संपर्क में था, जिसे उन्होंने जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) सूबेदार सुखविंदर बताया। उन्होंने तीन भारतीय अधिकारियों को इस ऑपरेशन में शामिल बताया:
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कमांडिंग ऑफिसर संदीप वर्मा (उर्फ समीर) – जम्मू-कश्मीर में तैनात
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सूबेदार सुखविंदर (उर्फ सिकंदर)
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सूबेदार अमित (उर्फ आदिल अमन)
भारत-पाक तनाव: क्या हो रहा है?
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कश्मीर में हालिया आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है।
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PM मोदी ने दर्जनभर देशों के नेताओं से बातचीत की और 100 देशों के राजनयिकों को बुलाकर पाकिस्तान के खिलाफ सबूत पेश किए।
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भारत ने पाकिस्तान को दिया डिप्लोमेट्स को वापस बुलाने का आदेश, जबकि पाकिस्तान ने कुछ संधियों से हटने की धमकी दी है।
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सीमा पर गोलीबारी की घटनाएं बढ़ी हैं, जबकि कश्मीर में सैकड़ों लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
क्या भारत सैन्य कार्रवाई की तैयारी में?
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पूर्व NSA शिवशंकर मेनन का कहना है कि “मोदी सरकार के पास सैन्य जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।”
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2019 की तरह एयरस्ट्राइक की संभावना पर चर्चा हो रही है, लेकिन इस बार कुछ अलग योजना बनाई जा सकती है।
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अमेरिका ने भारत के आतंकवाद विरोधी कदमों का समर्थन किया है, जबकि ईरान-सऊदी अरब और UN ने शांति की अपील की है।
खतरनाक समीकरण: परमाणु हथियारों का खतरा
दोनों देशों के पास परमाणु शस्त्रागार है, इसलिए किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई से स्थिति बिगड़ सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय दबाव कम होने के कारण भारत अधिक आक्रामक रुख अपना सकता है।








