
- बंदियों को कानूनी अधिकारों की विस्तृत जानकारी
- विधिक सहायता कैसे मिलती है बंदियों को?
- विचाराधीन बंदियों के लिए मुफ्त अधिवक्ता सुविधा
अम्बेडकरनगर। जिला कारागार परिसर में शुक्रवार को विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान विचाराधीन कैदियों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई।
निशुल्क कानूनी सहायता का अधिकार
अपर जिला जज एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव भारतेन्दु प्रकाश गुप्ता ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि किसी विचाराधीन बंदी को अपने मुकदमे में निशुल्क पैरवी की आवश्यकता हो, तो वह प्राधिकरण को प्रार्थना पत्र देकर वकील की मांग कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानूनी सहायता पाना हर बंदी का अधिकार है और इसे समय से सुनिश्चित किया जाएगा।
जेल प्रशासन को निर्देश
सचिव ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 479 के तहत आने वाले विचाराधीन बंदियों की सूची नियमित रूप से DLSA को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, उन बंदियों की जानकारी भी दी जाए, जिनकी जमानत मंजूर हो चुकी है, लेकिन जमानतदार के अभाव में वे जेल में बंद हैं। इससे उनकी रिहाई के लिए आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
जेल निरीक्षण एवं बंदियों से संवाद
शिविर के बाद सचिव ने जिला कारागार का निरीक्षण किया और हाल ही में स्थापित ओपन जिम का अवलोकन किया। जेल प्रशासन ने बताया कि यह जिम बंदियों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक साबित हो रहा है।
निरीक्षण के दौरान सचिव ने बंदियों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और जेल अधीक्षक को रिहाई संबंधी अधिकारों के प्रति बंदियों को जागरूक करने के निर्देश दिए। साथ ही, गर्मी के मद्देनजर शुद्ध पेयजल, पंखों की पर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं को बनाए रखने के आदेश जारी किए गए।
इस कार्यक्रम में जेल अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।









