क्यों सैमसंग पर लगा झूठे दस्तावेज पेश करने का आरोप?

  • सैमसंग की ट्रिब्यूनल में याचिका, टैक्स अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप
  • जियो को बख्शा, हमें निशाना बनाया गया: सैमसंग
  • टैक्स डिपार्टमेंट ने लगाया गलत क्लासिफिकेशन का आरोप

नई दिल्ली।  सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने भारतीय कर अधिकारियों द्वारा जारी 520 मिलियन डॉलर (लगभग 4,451 करोड़ रुपये) के टैक्स डिमांड नोटिस को टैक्स ट्रिब्यूनल में चुनौती दी है। कंपनी का आरोप है कि इनकम टैक्स विभाग ने उस पर टेलीकॉम उपकरणों के आयात में टैरिफ चुकाने से बचने का गलत आरोप लगाया है।

रिलायंस जियो के साथ भेदभाव

सैमसंग ने अपनी याचिका में कहा कि टैक्स अधिकारी लंबे समय से जानते थे कि रिलायंस जियो भी 2017 तक इसी तरह से उपकरण आयात कर रहा था, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। कंपनी का दावा है कि अगर उसे 2017 में रिलायंस जियो को मिली चेतावनी के बारे में पहले ही बताया गया होता, तो यह विवाद ही नहीं होता।

इसके अलावा, सरकार ने सैमसंग के सात अधिकारियों पर 81 मिलियन डॉलर (लगभग 693 करोड़ रुपये) का जुर्माना भी लगाया है।

2023 में मिली थी चेतावनी

सैमसंग पर आरोप है कि उसने मोबाइल टावरों में इस्तेमाल होने वाले ट्रांसमिशन कंपोनेंट्स को 10-20% टैरिफ से बचने के लिए गलत वर्गीकृत किया। कंपनी अपने नेटवर्क डिवीजन के जरिए ये उपकरण आयात करती थी और रिलायंस जियो को बेचती थी।

जांच में पाया गया कि 2018 से 2021 के बीच सैमसंग ने कोरिया और वियतनाम से 6,711 करोड़ रुपये के उपकरण आयात किए, लेकिन कोई टैरिफ नहीं चुकाया।

“सैमसंग ने कानून तोड़ा” – कस्टम विभाग

कमिश्नर ऑफ कस्टम्स, सोनल बजाज ने कहा कि सैमसंग ने भारतीय कानूनों का उल्लंघन किया और जानबूझकर झूठे दस्तावेज पेश किए। जांचकर्ताओं के अनुसार, कंपनी ने बिजनेस एथिक्स और उद्योग मानकों की अनदेखी की।

सैमसंग का बचाव

सैमसंग ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन किया है और वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।

2021 में हुई थी छापेमारी

यह मामला 2021 में तब सामने आया जब टैक्स अधिकारियों ने सैमसंग के मुंबई और दिल्ली स्थित दफ्तरों पर छापेमारी की थी। उस समय दस्तावेजों, ईमेल्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त किया गया था। कंपनी के कई शीर्ष अधिकारियों से भी पूछताछ की गई थी।

आगे की कार्रवाई

सरकार का कहना है कि टेलीकॉम टावरों में लगने वाले ये कंपोनेंट सिग्नल ट्रांसमिट करते हैं, इसलिए इन पर टैरिफ लागू होता है। हालांकि, सैमसंग इस दावे से सहमत नहीं है। अब यह मामला ट्रिब्यूनल में है, जहां आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

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