- आधार और अपार आईडी की समस्या: बच्चों की शिक्षा में आई नई अड़चनें
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ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तावेजों की कमी: विद्यालय प्रवेश की राह में रुकावटें
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शिक्षकों की चुनौती: अभिभावकों को दस्तावेज जुटाने में मदद की आवश्यकता
अम्बेडकरनगर। नई शिक्षा नीति के तहत नव सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई का मार्ग बच्चों के लिए कुछ और कठिन हो गया है। बच्चों का स्कूल में प्रवेश अब एक नई समस्या का शिकार हो गया है, जो दस्तावेजी चक्रव्यूह के रूप में सामने आ रहा है। ‘आधार’ और ‘अपार’ के दस्तावेजों के बिना नौनिहालों के सपने अधर में लटके हुए हैं।
‘आधार’ और ‘अपार’ की अड़चनें बच्चों के भविष्य पर भारी
शासन की ओर से कक्षा एक में प्रवेश के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन अधिकांश ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के पास न तो आधार कार्ड है और न ही जन्म प्रमाण-पत्र। इसके चलते बच्चों का स्कूल में दाखिला लटक गया है, और उनकी शिक्षा पर संकट मंडरा रहा है। जन्म प्रमाण-पत्र और आधार कार्ड की अनुपस्थिति के कारण बच्चों की शिक्षा की राह में तकनीकी अड़चनें उत्पन्न हो रही हैं।
शासन की प्रक्रिया और बच्चों के सपने
घर पर जन्म लेने वाले बच्चों का डिजिटल जन्म प्रमाण-पत्र बनवाना अब एक जटिल और धीमी प्रक्रिया बन गई है। आवेदन, सत्यापन और प्रमाणन में अभिभावकों की असहजता इस प्रक्रिया को और कठिन बना रही है। इसके कारण बच्चों के प्रवेश के समय दस्तावेजों की कमी एक बड़ी समस्या बन चुकी है।
शिक्षक भी अभिभावकों के मार्गदर्शक बने
विद्यालयों में शिक्षक बच्चों के दस्तावेज जुटाने में अभिभावकों की मदद कर रहे हैं, लेकिन शासन स्तर से कोई त्वरित समाधान न मिलने तक यह संघर्ष जारी रहेगा। कई विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान अब भी दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा।








