
- ईसीबी का ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों पर प्रतिबंध
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ईसीबी का ऐतिहासिक कदम
- महिला क्रिकेट में जैविक लिंग की अहमियत
इंग्लैंड। ईसीबी ने शुक्रवार को यह महत्वपूर्ण फैसला लिया, जो कि फुटबॉल एसोसिएशन (एफए) द्वारा किए गए समान निर्णय के बाद आया। एफए ने भी इसी सप्ताह ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को महिला फुटबॉल मैचों में खेलने से रोकने का ऐलान किया था।
ईसीबी ने इस कदम के पीछे सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि महिलाओं की कानूनी परिभाषा में ट्रांसजेंडर को शामिल नहीं किया जा सकता। बोर्ड के बयान में कहा गया कि इस फैसले के बाद ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की पात्रता संबंधी नियमों में बदलाव किया गया है।
नई नीति के तहत क्या होगा?
ईसीबी के बयान में बताया गया है कि अब केवल वे खिलाड़ी, जिनका जैविक लिंग महिला है, ही महिला और लड़कियों के क्रिकेट मैचों में खेल सकेंगे। हालांकि, ट्रांसजेंडर महिलाएं और लड़कियां ओपन और मिक्स्ड क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा करती रहेंगी।
ईसीबी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने उन्हें महिला और लड़कियों के क्रिकेट के लिए नए नियम बनाने के लिए प्रेरित किया है।








