
- सफाई, स्ट्रीट लाइट और टैक्स वसूली के मुद्दों पर बढ़ा विवाद
- कार्यकारिणी बैठक में मेयर सुषमा खर्कवाल और आयुक्त गौरव कुमार आमने-सामने
- नगर निगम के कामकाज पर पड़ा असर, जनता परेशान
लखनऊ। नगर निगम लखनऊ में इन दिनों मेयर और नगर आयुक्त के बीच खींचतान खुलकर सामने आ गई है। सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, टैक्स वसूली और पेयजल जैसी मूलभूत सेवाओं पर इस टकराव का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। पार्षदों के साथ जनता लगातार शिकायतें कर रही है, लेकिन निर्णयों पर अमल न होने से कामकाज ठप हो गया है।
पिछले दिनों कार्यकारिणी की बैठक में मेयर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस हुई। मामला बढ़ने के बाद फिलहाल दोनों पक्ष शांत हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक शासन स्तर पर पैरवी की अटकलें तेज हैं।
मेयर ने कहा कि पिछले सदन में पारित प्रस्तावों की पुष्टि के बिना किसी नए निर्णय पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। वहीं, नगर आयुक्त का कहना है कि “सभी कार्य नियमानुसार होंगे और किसी संस्था को बाध्य नहीं किया जा सकता।”
सफाई व्यवस्था और कंपनियों पर गिरी गाज
शहर में सफाई और कूड़ा कलेक्शन का काम लखनऊ स्वच्छता अभियान (LSA) और लायन एनवायरो कंपनियां देख रही हैं। लगातार निरीक्षणों में खामियां मिलने पर दोनों पर कार्रवाई की जा रही है। प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना के निरीक्षण में हाल ही में 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
स्ट्रीट लाइट व्यवस्था बिगड़ी, टेंडर अधर में
ईएसएल कंपनी के जाने के बाद शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। नगर निगम की टीमों ने काम शुरू तो किया, लेकिन मैनपावर की कमी और नीतिगत निर्णय न होने से स्थिति नहीं सुधरी। टेंडर अभी तक फाइनल नहीं हुआ है, जिससे लाइटों की मरम्मत अटक गई है।
हाउस टैक्स और कॉमर्शियल टैक्स में गड़बड़ी
शहर में टैक्स वसूली में मनमानी के आरोप लग रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि कई होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अनुचित छूट दी जा रही है। अब निगम एक समिति बनाकर टैक्स नीति पर रिपोर्ट तैयार करने की योजना बना रहा है।
सीवर, जलकल और अतिक्रमण की शिकायतें बरकरार
पुराने लखनऊ में सीवर ओवरफ्लो की समस्या बनी हुई है, वहीं जिन क्षेत्रों में सीवर लाइन नहीं है, वहां भी टैक्स वसूला जा रहा है। अतिक्रमण और अवैध विज्ञापनों की शिकायतें भी लगातार मिल रही हैं।








