
- टांडा ब्लॉक की चिंतौरा पंचायत में सबसे अधिक ₹30.16 लाख की गड़बड़ी
- 24 ग्राम प्रधानों व 13 तत्कालीन सचिवों के खिलाफ वसूली प्रमाण पत्र (RC) जारी
- डीपीआरओ ने धनवसूली और विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए
अम्बेडकरनगर। जिले की 24 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर खर्च की गई सरकारी धनराशि में गबन और वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है। वर्ष 2016-17 तक के अभिलेखीय परीक्षण के बाद कुल ₹1,29,77,791 की धनराशि के गबन की बात सामने आई, जिसे लेकर प्रशासन ने अब निर्णायक कार्रवाई की शुरुआत कर दी है। संबंधित 24 ग्राम प्रधानों और 13 तत्कालीन ग्राम सचिवों के विरुद्ध वसूली प्रमाण पत्र (आरसी) जारी कर दिया गया है।
खर्च का कोई हिसाब नहीं, आडिट में खुली फर्जीवाड़े की परतें
आडिट टीम द्वारा की गई विस्तृत जांच में सामने आया कि संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा कार्यों में खर्च की गई धनराशि का कोई वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया। शासन द्वारा आवंटित लाखों रुपये विकास कार्यों में खर्च दिखाए गए, लेकिन उनसे जुड़ी खरीद-बिक्री, भुगतान या निर्माण कार्यों के दस्तावेज आडिट टीम को नहीं मिले। आपत्ति के बाद भी जब जवाब संतोषजनक नहीं दिया गया, तब यह मान लिया गया कि धन का दुरुपयोग या गबन किया गया है।
चिंतौरा, कैही, चितवई में सर्वाधिक गड़बड़ी, टांडा ब्लॉक सबसे ऊपर
सर्वाधिक अनियमितता टांडा ब्लॉक की ग्राम पंचायत चिंतौरा में सामने आई जहां ₹30.16 लाख की गड़बड़ी पाई गई। इसके अलावा कैही में ₹12.83 लाख, चितवई में ₹11.66 लाख, खैरपुर में ₹10.96 लाख की गड़बड़ी उजागर हुई। इसी क्रम में बदरुद्दीनपुर, बेलहरी, दौलतपुर एकसारा, जगन्नाथपुर, अंगवल, नरसिंहदासपुर, बरौरा, वासूपुर बनियानी जैसे गांव भी सूची में शामिल हैं।
पूर्व प्रधानों और सचिवों पर जवाबदेही तय, आरसी जारी
जिन ग्राम पंचायतों में यह गड़बड़ी सामने आई, वहां उस अवधि में कार्यरत रहे प्रधानों को दोषी ठहराया गया है।








