पुतिन और जेलेंस्की की मुलाकात- क्या यह शांति की शुरुआत होगी?

  • पुतिन और जेलेंस्की की सीधी मुलाकात, क्या होगी बातचीत की दिशा?
  • 30 दिन का बिना शर्त युद्धविराम, क्या रूस मानेगा?
  • ट्रम्प का हस्तक्षेप,  क्या अमेरिका की भूमिका से बदलेगा समीकरण?

कीव।  यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सीधी बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि वह 15 मई (गुरुवार) को तुर्किये (इस्तांबुल) में पुतिन से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए तैयार हैं। यह दोनों नेताओं के बीच 2019 के बाद पहली बार सीधी वार्ता होगी।

युद्धविराम को लेकर ज़ेलेंस्की की शर्त

ज़ेलेंस्की ने 12 मई से 30 दिन के बिना शर्त युद्धविराम की मांग की है। उन्होंने कहा, “हम रूस से इसकी मांग करते हैं। कोई भी शर्त युद्ध को लंबा खींचने और कूटनीति को कमजोर करने जैसा होगा।” हालांकि, पुतिन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

पुतिन ने इस्तांबुल में बातचीत का प्रस्ताव रखा

11 मई को पुतिन ने यूक्रेन के साथ सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखते हुए कहा था कि वह 15 मई को इस्तांबुल में वार्ता के लिए तैयार हैं। उन्होंने युद्धविराम के लिए कोई स्पष्ट सहमति नहीं दी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव के बाद ज़ेलेंस्की ने बातचीत को हरी झंडी दे दी।

ट्रम्प ने कहा – “महान दिन होगा”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस वार्ता को “रूस और यूक्रेन के लिए एक महान दिन” बताया। उन्होंने कहा, “यह लाखों लोगों की जान बचा सकता है। अमेरिका युद्ध के बजाय पुनर्निर्माण और आर्थिक सहयोग पर ध्यान देगा।”

यूरोपीय देशों ने यूक्रेन को दिया समर्थन

10 मई को फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और पोलैंड के नेताओं ने कीव में ज़ेलेंस्की से मुलाकात की और रूस को चेतावनी दी कि अगर वह युद्धविराम नहीं मानता है, तो यूक्रेन को और सैन्य सहायता दी जाएगी। ब्रिटिश PM कीर स्टारमर ने कहा, “अगर पुतिन शांति से मुंह मोड़ते हैं, तो हम जवाब देंगे।”

युद्धविराम उल्लंघन के आरोप

  • रूस ने यूक्रेन पर 14,000 बार युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया।

  • यूक्रेन ने कहा कि रूस ने 11 मई की रात 108 ड्रोन हमले किए, जिनमें से 60 को मार गिराया गया।

युद्ध की पृष्ठभूमि

  • फरवरी 2022: रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, पश्चिमी देशों ने पुतिन की आलोचना की।

  • फरवरी 2025: ट्रम्प ने पुतिन से 90 मिनट बातचीत की और ज़ेलेंस्की को “तानाशाह” कहा।

अब देखना होगा कि 15 मई को इस्तांबुल में होने वाली वार्ता युद्ध को रोकने में कितनी कारगर साबित होती है

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