
- NEET PG नॉर्मलाइजेशन पर SC में आज सुनवाई
- 2025 की परीक्षा को लेकर छात्रों में चिंता
- परीक्षा को एक शिफ्ट में कराने की मांग
नई दिल्ली। NEET PG परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन सिस्टम को लेकर छात्रों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होने वाली है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस ए.जी. मसीह की बेंच ने कहा था कि यह मामला 2024 की परीक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसकी सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। मगर याचिकाकर्ता अब भी इस पर जोर दे रहे हैं कि 2025 की परीक्षा में भी यही मुद्दा दोहराया जा सकता है, जो हजारों छात्रों के लिए चिंता का कारण है।
सितंबर 2024 में दायर की गई थी याचिका
NEET PG 2024 के अभ्यर्थियों ने परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सितंबर 2024 में याचिका दायर की थी। स्टूडेंट्स की प्रमुख मांगें थीं:
परीक्षा एक ही शिफ्ट में कराई जाए।
प्रश्न पत्र और छात्रों की उत्तर कुंजी (आंसर शीट) सार्वजनिक की जाए।
छात्रों का कहना है कि दो शिफ्टों में परीक्षा कराने से प्रश्न पत्रों की कठिनाई स्तर में अंतर आ जाता है, जिससे नॉर्मलाइजेशन के जरिए रिजल्ट तैयार किया जाता है, जो फेयर नहीं माना जाता।
क्या है नॉर्मलाइजेशन प्रोसेस?
जब किसी परीक्षा को कई शिफ्टों में आयोजित किया जाता है तो हर शिफ्ट में प्रश्न पत्र अलग होता है। ऐसे में नॉर्मलाइजेशन सिस्टम लागू होता है, जिसमें अलग-अलग सेट्स का औसत स्कोर देखा जाता है और कठिन प्रश्न पत्र वाले छात्रों को बोनस मार्क्स तथा आसान सेट वाले छात्रों के कुछ मार्क्स घटा दिए जाते हैं।
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उदाहरण:
सेट A का औसत स्कोर: 70
सेट B का औसत स्कोर: 75
सेट C का औसत स्कोर: 80








