
- दिसंबर 2025 तक शेष निर्माण कार्य पूरा होगा
- राम दरबार तक श्रद्धालुओं के लिए विशेष मार्ग और दर्शन पास
- पत्थर का काम लगभग पूरा, केवल रामकथा मंडप में बाकी
अयोध्या। अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में अब तक लगभग 45 किलो सोने का इस्तेमाल किया जा चुका है। इसकी कीमत टैक्स छोड़कर करीब 50 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह जानकारी शुक्रवार को राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन और पूर्व IAS अधिकारी नृपेंद्र मिश्र ने दी।
उन्होंने बताया कि मंदिर के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित गर्भगृह, जहां भगवान राम विराजमान हैं, वहां के सभी 20 दरवाजों और सिंहासन पर सोने की परत चढ़ाई गई है। ग्राउंड फ्लोर में 14 और पहले फ्लोर पर 6 दरवाजे हैं, जिनपर प्रत्येक पर 3 किलो सोने की परत लगाई गई है।
नृपेंद्र मिश्र ने आगे कहा कि जन्मभूमि परिसर के शेषावतार मंदिर समेत अन्य मंदिरों में भी सोने का प्रयोग किया जाएगा। इसके अलावा, महाराष्ट्र के एक बड़े कारोबारी, दिलीप जी ने यहां करीब 45-50 किलो सोना दान किया है। दिलीप जी ने इससे पहले सोमनाथ और काशी के विश्वनाथ मंदिरों में भी सोना दान किया था। हालांकि, उन्होंने दान की तारीख के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
गुरुवार को राम मंदिर के पहले फ्लोर पर भगवान राम के परिवार के सदस्यों की मूर्तियों के साथ राजा राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा भी सम्पन्न हुई। इसमें मां सीता, भाई भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और बजरंगबली की प्रतिमाएं स्थापित की गईं।
नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि राम मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। अब केवल रामकथा मंडप, संग्रहालय, सभागार और गेस्ट हाउस का काम बाकी है, जिसे दिसंबर 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्माण कार्य केवल मानव शक्ति से नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम की कृपा और दैविक शक्ति से संभव हुआ है।









