प्राथमिक स्कूलों के विलय पर हाईकोर्ट में सुनवाई

  • हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका पर सुनवाई
  • याचिकाकर्ता ने RTE एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया
  • सरकार का दावा- स्कूल बंद नहीं होंगे, केवल विलय

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 50 से कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक और जूनियर स्कूलों के विलय के खिलाफ दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई जस्टिस पंकज भाटिया की एकलपीठ में हुई, लेकिन समय की कमी के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। अब यह सुनवाई शुक्रवार को जारी रहेगी, जिसमें राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इसके बाद अतिरिक्त समय नहीं मिलेगा।

याचिकाकर्ता बोले- RTE एक्ट का उल्लंघन, बच्चों की पढ़ाई पर संकट

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने दलील दी कि यह फैसला शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि स्कूलों के आपसी विलय से बच्चों को दूर स्थित स्कूलों में भेजना पड़ेगा, जिससे बच्चों की सुरक्षा, पहुंच और नियमित उपस्थिति पर असर पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा सीमित होने के कारण छात्रों की पढ़ाई बाधित होगी

सरकार का पक्ष: बिना छात्र वाले 58 स्कूल, बंद नहीं होंगे, उपयोग बदलेंगे

राज्य सरकार की ओर से एएजी अनुज कुदेशिया ने कोर्ट में बताया कि प्रदेश में 58 ऐसे स्कूल हैं जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है। सरकार का उद्देश्य किसी स्कूल को बंद करना नहीं है, बल्कि ऐसे स्कूलों को अन्य सरकारी कार्यों में उपयोग किया जाएगा। सरकार छात्रों को सुविधाजनक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए यह कदम उठा रही है।

क्या है पूरा मामला?

प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) दीपक कुमार ने आदेश जारी किया कि 50 से कम छात्र संख्या वाले परिषदीय स्कूलों का विलय पास के स्कूलों में किया जाए। स्कूल शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा ने सभी बीएसए से ऐसे स्कूलों का ब्योरा मांगा है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि स्कूलों के बीच कोई नदी, नाला, रेलवे ट्रैक या हाईवे न हो जिससे सुरक्षा सुनिश्चित रहे।

प्रदेशभर में हो रहे विरोध

सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में शिक्षक संगठनों और विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। इसी के चलते यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा है।

सरकार की मंशा: बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं

प्रदेश सरकार का तर्क है कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा (NCF)-2020 के तहत उठाया गया है। इसके माध्यम से स्कूलों के संसाधनों का समन्वय और साझा उपयोग किया जाएगा।

क्या तैयारियां हैं?

  • हर जिले में खोले जा रहे मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय (कक्षा 1-8)

  • हर विद्यालय में 450 छात्रों के लिए स्मार्ट क्लास, शौचालय, फर्नीचर, पुस्तकालय, मिडडे मील किचन, सीसीटीवी, ओपन जिम, शुद्ध पेयजल आदि की व्यवस्था

  • स्कूलों की बिल्डिंग अपग्रेड करने पर ₹1.42 करोड़ खर्च

  • प्रत्येक जिले में बनेगा एक मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल (कक्षा 1-12)

  • इन स्कूलों में 1500 छात्रों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी, साइंस लैब, खेल मैदान, कौशल विकास केंद्र बनाए जाएंगे

  • कक्षा 11-12 के लिए विज्ञान, वाणिज्य और कला संकाय की अलग-अलग कक्षाएं

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