लखनऊ के एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने स्पेस स्टेशन में की किसानी

  • एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने ISS में मेथी और मूंग के बीज उगाए
  • माइक्रो ग्रैविटी में बीजों के विकास पर वैज्ञानिक प्रयोग किया
  • 41 साल बाद अंतरिक्ष में पहुंचे दूसरे भारतीय

लखनऊ। भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला इन दिनों इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में वैज्ञानिक प्रयोगों में व्यस्त हैं। खास बात यह रही कि वे स्पेस में “किसानी” करते नजर आए। शुभांशु ने अपने साथ ले जाए गए मेथी और मूंग के बीजों को पेट्री डिश में उगाया और उनके अंकुरण की प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया। इसके साथ ही उन्होंने बीजों के साथ सेल्फी भी ली और बाद में इन बीजों को स्टोरेज फ्रीजर में सुरक्षित रख दिया।

यह प्रयोग यह जांचने के लिए किया गया कि माइक्रो ग्रैविटी पौधों के शुरुआती विकास को किस तरह प्रभावित करती है। एक्सिओम स्पेस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन बीजों को पृथ्वी पर लौटने के बाद कई पीढ़ियों तक उगाया जाएगा, जिससे उनके जेनेटिक्स, DNA और पोषण प्रोफाइल में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया जा सके।

41 साल बाद कोई भारतीय पहुंचा अंतरिक्ष

शुभांशु शुक्ला 26 जून को ISS पहुंचे थे। वे 41 साल बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने हैं। इससे पहले 1984 में राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष की यात्रा की थी। शुभांशु एक्सिओम मिशन-4 के तहत 25 जून को दोपहर करीब 12 बजे रवाना हुए थे। वह फ्लोरिडा तट पर लौटने वाले थे, लेकिन मौसम की वजह से वापसी की तारीख फिलहाल टाल दी गई है।

माइक्रो ग्रैविटी से जुड़ी रिसर्च में भारत को मिलेगा फायदा

बुधवार को एक्सिओम स्पेस की चीफ साइंटिस्ट डॉ. लूसी लोव ने मिशन पर गए क्रू से बातचीत की। इस दौरान शुभांशु ने बताया कि वे माइक्रो ग्रैविटी में बीजों के विकास, स्टेम सेल अध्ययन और अंतरिक्ष में मस्तिष्क पर पड़ने वाले असर पर रिसर्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा,

“स्टेम सेल के अध्ययन को लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं। इससे पता चलेगा कि क्या सप्लीमेंट्स लेने से चोट की रिकवरी तेज होती है या नहीं। यह मिशन भारतीय वैज्ञानिकों के लिए नई राह खोलेगा।”

पिता बोले- “अब बच्चे से मिलने की खुशी हो रही है”

लखनऊ में शुभांशु के पिता एसडी शुक्ला ने कहा,

“बच्चा मिशन पूरा करके वापस आ रहा है, इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है। उसने वीडियो कॉल में बताया था कि वहां कहां सोते हैं, कहां एक्सपेरिमेंट होते हैं। हम भगवान का धन्यवाद करते हैं।”

वहीं मां आशा शुक्ला ने कहा,

“जैसे जाते समय खुशी थी, वैसे ही अब उसके लौटने की खुशी हो रही है। जब बेटा आएगा तो घर सजाएंगे और बाहें फैलाकर उसका स्वागत करेंगे।”

गगनयान मिशन में काम आएगा अनुभव

शुभांशु का यह अनुभव भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसे 2027 तक लॉन्च किए जाने की संभावना है। इस मिशन में भारतीय गगनयात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा।

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