जांच रिपोर्ट में फायर सेफ्टी में गंभीर खामियां पाई गईं

सर्वर रूम और उपकरण कक्ष अलग किए जाएंगे

फायर सेफ्टी सुधार कार्य की लागत 2.5 करोड़ रुपए

उत्तर रेलवे अस्पताल में 26 अक्टूबर को आग लगी

लखनऊ। उत्तर रेलवे के इंडोर रेलवे अस्पताल में 26 अक्टूबर को लगी आग की जांच रिपोर्ट तैयार कर डीआरएम सुनील कुमार वर्मा को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था में कई गंभीर खामियों की पुष्टि हुई है।

जांच के आधार पर अब सर्वर रूम और उपकरण कक्ष को पूरी तरह अलग-अलग किया जाएगा। इसके साथ ही फायर सेफ्टी ऑडिट में सुझाए गए सभी कार्य लगभग 2.5 करोड़ रुपए की लागत से करवाए जाएंगे।

एयर कंडीशनिंग और स्टाफ की कमी

जांच में पता चला कि सर्वर रूम में न तो एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था थी और न ही सिग्नल-टेलीकॉम विभाग का कोई कर्मचारी तैनात था। इसके अलावा, पहले कराए गए थर्ड पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिट की संस्तुतियों को नजरअंदाज किया गया। इसी वजह से शॉर्ट सर्किट हुआ और आग फैलने का खतरा बढ़ गया।

मरीजों की जान पर मंडरा रहा खतरा

आग लगने के समय अस्पताल में लगभग 130 मरीज भर्ती थे। सर्वर रूम के ठीक सामने मरीजों को रखा गया था, जिससे इमरजेंसी, क्रिटिकल केयर, पोस्ट-ऑपरेटिव, मेडिकल, सर्जिकल, महिला और चिल्ड्रेन वार्ड के मरीजों की जान जोखिम में पड़ गई। अग्निशमन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

सात सदस्यीय जांच टीम की पुष्टि

रेलवे प्रशासन ने हादसे के तुरंत बाद सात सदस्यीय जांच टीम गठित की थी, जिसमें सीनियर डीएसटीई, डीएसओ, डीईई के साथ मेडिकल और आरपीएफ अधिकारी शामिल थे। टीम ने मौके का निरीक्षण कर तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही की पुष्टि की।

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