
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली है। अदालत ने मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि वह सभी राज्यों में SIR प्रक्रिया के दौरान नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जानी चाहिए। विशेष रूप से तमिलनाडु में जिन मतदाताओं के नाम स्पेलिंग की त्रुटियों के कारण हटाए गए हैं, उनकी सूची ग्राम पंचायत भवन, उपखंड कार्यालय, तालुका कार्यालय और शहरी क्षेत्रों के वार्ड कार्यालयों में चस्पा करने के निर्देश दिए गए हैं।
महिलाओं और गरीबों के नाम कटने पर चिंता
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि नई मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम काटे जा रहे हैं, जो पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का सबसे ज्यादा असर गरीब, कमजोर, अनपढ़ और प्रवासी नागरिकों पर पड़ रहा है।
प्रशांत भूषण ने दलील दी कि मतदाताओं पर स्वयं फॉर्म भरने की जिम्मेदारी डाल दी गई है, जिससे पढ़े-लिखे न होने वाले और बाहर काम करने वाले लोग इस प्रक्रिया से वंचित हो रहे हैं।
चुनाव आयोग की मनमानी पर सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग मनमानी नहीं कर सकता। चुनाव अधिकारी यह तय करने का अधिकार नहीं रखते कि कोई व्यक्ति नागरिक है या नहीं, क्योंकि वे कोई न्यायालय नहीं हैं। यदि किसी मतदाता के नाम पर विवाद हो, तो उसे अपनी बात रखने और जिरह का मौका मिलना चाहिए।
कोर्ट का सख्त संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का सही और निष्पक्ष होना बेहद जरूरी है। अदालत ने चुनाव आयोग को चेताया कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से न हटे, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।
फिलहाल कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिस पर आने वाले दिनों में निर्णय सुनाए जाने की संभावना है।









