योगासन कार्यशाला में स्वास्थ्य, अनुशासन और भारतीय संस्कृति पर हुआ मंथन

तक्षशिला अकादमी में जुटे खिलाड़ी, प्रशिक्षक और पदाधिकारी, योगासन को जन-जन तक पहुंचाने का लिया संकल्प

  • खिलाड़ियों को प्रतियोगी योगासन की जानकारी
  • योग को स्वस्थ जीवनशैली का आधार बताया
  • योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य विरासत : हवलदार सिंह
  • प्रधानाचार्य को सम्मानित किया गया

अंबेडकरनगर। जिला योगासन स्पोर्ट एसोसिएशन के तत्वावधान में रविवार को शहर स्थित तक्षशिला अकादमी में एकदिवसीय योगासन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में योगासन को खेल एवं स्वस्थ जीवनशैली के रूप में बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, शिक्षकों एवं पदाधिकारियों ने सहभागिता करते हुए योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद योगासन से जुड़े प्रशिक्षकों ने विभिन्न योग क्रियाओं और आसनों का प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों को योग के महत्व से अवगत कराया। वक्ताओं ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि मानसिक संतुलन, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का माध्यम भी है। वर्तमान समय में बढ़ती तनावपूर्ण जीवनशैली के बीच योग की उपयोगिता और अधिक बढ़ गई है।
कार्यशाला के दौरान खिलाड़ियों को प्रतियोगी योगासन की बारीकियों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि योगासन अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। युवाओं को इस क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकते हैं, बशर्ते वे नियमित अभ्यास और अनुशासन को अपनाएं।
“योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य विरासत”
कार्यक्रम में मौजूद क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष बाबू हवलदार सिंह ने कहा कि योग भारत की प्राचीन परंपरा और संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग मानसिक तनाव और शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में योग ही ऐसा माध्यम है जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने का कार्य करता है। उन्होंने युवाओं से नियमित योगाभ्यास करने और इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

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