
अंबेडकरनगर। जनपद की गौशालाओं में संरक्षित गोवंशों के स्वास्थ्य और पोषण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने नेपियर घास योजना शुरू की है। इसके तहत गौशालाओं से जुड़ी चारागाहों और आसपास उपलब्ध भूमि पर नेपियर घास की बुवाई कराई जाएगी।
नेपियर घास की विशेषताएं और लाभ
नेपियर घास बहुवर्षीय हरा चारा है। इसे एक बार लगाने के बाद 5 से 7 वर्षों तक हर मौसम में काटकर गोवंशों को खिलाया जा सकता है। घास में आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन के लिए लाभकारी हैं।
भूमि और बजट का प्रावधान
शासन स्तर से जनपद में कुल 10 हेक्टेयर भूमि पर नेपियर घास की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 22,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से कुल 2 लाख 20 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा यह धनराशि 23 गौशालाओं को उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की गई है।
बुवाई का कार्य और जिम्मेदारी
नेपियर घास की बुवाई संबंधित पंचायत सचिवों और ग्राम प्रधानों के माध्यम से कराई जाएगी। जनपद में कुल 39 गौशालाओं में लगभग 5,200 गोवंश संरक्षित हैं। इनके भरण-पोषण के लिए पहले से भूसा, पशु आहार और चोकर की व्यवस्था की जाती रही है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी की अपील
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ए. के. सिंह ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक मात्रा में नेपियर घास की खेती करें। इससे गोवंशों की सेहत में सुधार के साथ दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे गौशालाओं से जुड़े पंचायत सचिवों और ग्राम प्रधानों को चारा बुवाई के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दें।








