तमसा तट पर भागवत कथा में गजेन्द्र प्रसंग का वर्णन

अंबेडकरनगर। अकबरपुर स्थित तमसा तट प्रांगण में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस मंगलवार को कथा व्यास साध्वी भाग्यश्री भारती ने गजेन्द्र प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने मानव जीवन और आस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

गजेन्द्र प्रसंग से जीवन का संदेश

साध्वी भाग्यश्री भारती ने कहा कि गजेन्द्र की कथा हर व्यक्ति के जीवन का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि मनुष्य जीवन में भौतिक सुख, रिश्तों और भोग-विलास में व्यस्त रहता है। कठिन समय आने पर कोई साथ नहीं देता। ऐसे में स्थायी और भरोसेमंद संबंध केवल ईश्वर से ही बन सकता है।

उन्होंने कहा कि सांसारिक संबंध स्वार्थ पर आधारित होते हैं, जबकि ईश्वर के साथ संबंध स्थायी होता है। जीवन में निर्भयता और स्थिरता के लिए ईश्वर को जानना आवश्यक है।

धर्म और अधर्म की व्याख्या

कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि जब अधर्म और अन्याय बढ़ता है, तब ईश्वर अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं।

उन्होंने कंस को अज्ञान और नकारात्मकता का प्रतीक बताया। कहा कि जब मनुष्य के विचार संकीर्ण हो जाते हैं, तब समाज में भेदभाव और हिंसा बढ़ती है।

प्रभु से दूरी ही दुख का कारण

साध्वी ने कहा कि जैसे प्रकाश से दूर रहने पर अंधकार होता है, वैसे ही ईश्वर से दूरी जीवन में दुख और असंतोष का कारण बनती है। उन्होंने अवतार का अर्थ समझाते हुए बताया कि ईश्वर जनकल्याण के लिए पृथ्वी पर आते हैं और मानव को सही मार्ग दिखाते हैं।

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