
- 9 जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला मामले पर सुनवाई शुरू की
- केंद्र सरकार ने पुराने फैसले को गलत बताते हुए पुनर्विचार की मांग की
- मासिक धर्म आयु की महिलाओं के प्रवेश पर रोक बनाए रखने की पैरवी
नई दिल्ली। भारत का सर्वोच्च न्यायालय की 9 जजों की संविधान पीठ ने मंगलवार को Sabarimala Temple में महिलाओं के प्रवेश को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई शुरू की। अदालत यह तय करेगी कि पहले दिया गया फैसला बरकरार रखा जाए या उसमें बदलाव किया जाए।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि सबरीमाला मामले में पहले दिया गया निर्णय गलत था और इसे पुनः विचार कर बदला जाना चाहिए। केंद्र ने दलील दी कि मासिक धर्म आयु की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगी रोक को बरकरार रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है और इसमें न्यायालय को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
कार्यवाही के दौरान जस्टिस B V Nagarathna ने ‘अनुच्छेद 17’ के संदर्भ में अपनी शंका जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस मामले में ‘अछूत प्रथा’ से जुड़े प्रावधान को किस तरह लागू किया जाए, यह स्पष्ट नहीं है। एक महिला के तौर पर उन्होंने टिप्पणी की कि यह स्वीकार्य नहीं हो सकता कि किसी महिला को हर महीने कुछ दिनों के लिए ‘अछूत’ माना जाए और फिर अचानक यह स्थिति समाप्त हो जाए।
जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि यदि कोई सामाजिक बुराई धार्मिक परंपरा के नाम पर जारी है, तो अदालत यह तय कर सकती है कि वह वास्तव में सामाजिक कुरीति है या अनिवार्य धार्मिक प्रथा।









