
अम्बेडकरनगर में फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए जाने का बड़ा मामला सामने आया है। जांच में अब तक एक हजार से अधिक फर्जी प्रमाणपत्र जारी होने की पुष्टि हुई है। मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के अनुसार यह फर्जीवाड़ा जहांगीरगंज सीएचसी से जुड़ा है। यहां तैनात संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर अंजनी कुमार पर आरोप है कि उसने फर्जी पोर्टल तैयार कर ओटीपी अपने मोबाइल नंबर पर सेट किया और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर नियंत्रण कर लिया।
इसके साथ ही पीएचसी नरियांव की एएनएम रामरती की भूमिका भी जांच में सामने आई है। दोनों पर कूटरचना और धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप है।
प्रति प्रमाणपत्र वसूली का भी आरोप
सूत्रों के अनुसार एक प्रमाणपत्र के बदले एक से डेढ़ हजार रुपये तक वसूली की जाती थी। कई मामलों में प्रसव निजी नर्सिंग होम में होने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें ऑपरेटर को रुपये लेते हुए दिखाया गया। इसके बाद शिकायत सीएमओ कार्यालय तक पहुंची।
जांच में खुलासा, कार्रवाई शुरू
डिप्टी सीएमओ और पूर्व अधीक्षक की जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई। 27 मार्च को रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी गई। इसके बाद एएनएम को निलंबित किया गया और ऑपरेटर की सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू की गई।
तीन दिन बाद डिप्टी सीएमओ की तहरीर पर जहांगीरगंज थाने में दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
बड़े नेटवर्क की आशंका, जांच जारी
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए तो एक बड़े गिरोह का खुलासा हो सकता है। फिलहाल पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।









