मोदी का फैसला, सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया: प्रदीप जैन

झांसी। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के लागू करने के साथ ही शुरू हुई राजनीति आज प्रधानमंत्री के इन कानूनों के वापस लेने की घोषणा के बाद भी बादस्तूर जारी है। प्रधानमंत्री के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 600 से अधिक किसानों की आंदोलन के दौरान मौत हुई और अब मोदी जी ने कानून वापस ले लिया। आखिर मिला क्या “ सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया।

प्रधानमंत्री का यह फैसला बताता हैे कि इस सरकार और इसके मुखिया को ही चीजों की समझ नहीं है। किसान पहले ही दिन से इन कानूनों का विरोध कर रहे थे लेकिन सरकार अपने दंभ में कानूनों को लागू कर दिया। अब किसान आंदोलन का दबाव इतना बढ़ा कि कानून वापस ले लिया। कानून तो वापस ले लिया लेकिन आंदोलन में जिन किसानों ने अपनी जान गंवायी उनके परिजनों का क्या होगा। हम मांग करते हैं कि उन किसानों के परिजनों को मुआवजा दिया जाएं और उनके घर के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए।

झांसी-ललितपुर सांसद अनुराग शर्मा ने प्रधानमंत्री की घोषणा पर कहा “ आज बहुत शुभ दिन है गुरूपूर्व और रानी लक्ष्मीबाई का जन्मदिवस है और इस अवसर पर उन्होंने अपना बड़ा ह्रदय दिखाते हुए पितातुल्य अपने नाराज बैठे बच्चों को एक तोहफा दिया है। हमने पहले भी इस तरह के डायनेमिक फैसले किये है जब जीएसटी का लगातार विरोध हो रहा था तो हम सामंजस्य बैठाने के लिए बार बार बदलाव कर करते रहे और बदलाव किया भी। वैसे भी अगर इन कानूनाें काे देखें ताे इन्हें देश में कहीं भी लागू तो किया नहीं गया था, जब लागू ही नहीं थे और फिर भी एतराज था तो हटा दिये।

आंदोलन में हुई किसानों की मौत के मामले पर सांसद ने कहा कि विपक्ष ने केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए किसानों को भ्रमित कर ठंड के मौसम में सड़कों पर बैठाया और किसानों की जान गयीं। किसानों की मौत पर तो हमें भी बहुत दुख है लेकिन यह किसान हानि सरकार के कारण नहीं बल्कि विपक्ष के कुत्सित इरादों के चलते हुई।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और कृषक भारती काॅपरेटिव लिमिटेड (कृभको) के चेयरमैन डॉ़ चंद्रपाल सिंह यादव ने सरकार के इस निर्णय को देर से लिया गया सही फैसला बताया। उन्होंने कहा कि जो कानून अब वापस लिये गये हैं उन्हें काफी पहले ही वापस ले लेना चाहिए था। फैसले में हुई इस देरी से किसानों को बहुत नुकसार हुआ। देर से आये लेकिन दुरूस्त आये।

झांसी सदर विधायक रवि शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री जनहित से जुड़े मुद्दों पर बहुत संवेदनशील हैं। ये कानून भी किसान हित में थे लेकिन किसान विपक्ष द्वारा फैलाये भ्रमजाल में फंसकर अपना हित नहीं देख पाये । कई दौर की बातचीत के बाद भी जब कोई हल नहीं निकला तो प्रधानमंत्री ने घर के मुखिया के रूप में बड़प्पन दिखाते हुए कानून वापस लेने की घोषणा कर दी। जहां तक रहा विपक्ष के इस फैसले पर भी सवाल उठाने की बात है तो विपक्ष का तो काम ही विरोध करना है। अगर हम अच्छा करें तो भी और बुरा करें तब तो बुरा है ही। विपक्ष अपनी भूमिका ईमानदारी से निभा नहीं पा रहा है , इनके पास कोई मुद्दा नहीं है लेकिन अगर देश में विकास की बात न होकर केवल राजनीति ही होनी है तो फिर राजनीति के नजरिये से ही सब देखा जायेगा। सरकार किसानों के हित में ही कृषि काूननों को लायी थी लेकिन अगर किसान अपना हित नहीं चाहते तो यही सही। मोदी जी हर काम सही समय पर करते हैं और अब उन्होंने यह फैसला किया है तो यह भी काफी सोचसमझकर किया ।

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