- खसरा नंबर 611 और 612 पर नमाज की अनुमति
- स्थानीय किसानों ने जमीन पर जताया स्वामित्व दावा
- जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाने की चेतावनी
- मुस्लिम पक्ष ने कीचड़ के चलते बदला नमाज स्थल
धार (मध्य प्रदेश)। धार स्थित भोजशाला परिसर की बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 611 और 612 की जमीन पर जुमे की नमाज की प्रशासनिक अनुमति दिए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। स्थानीय रहवासियों ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए जमीन पर अपना स्वामित्व होने का दावा किया है।
स्थानीय निवासी चंद्रकांत देवड़ा ने कहा कि जिस स्थान पर नमाज की अनुमति दी गई है, वह उनकी कृषि भूमि है और वे लंबे समय से वहां खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वामित्व स्पष्ट किए बिना वहां नमाज नहीं होने दी जाएगी।
राधाबाई ने भी प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी जमीन को समतल करने या किसी अन्य कार्य के लिए प्रशासन पहुंचता है तो इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का रुख भी किया जाएगा।
दूसरी ओर मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने बताया कि लगातार बारिश के कारण खसरा नंबर 611 की जमीन पर अधिक कीचड़ है। इसलिए इस शुक्रवार जुमे की नमाज खसरा नंबर 612 की उस जमीन पर अदा की जाएगी, जो कमाल मौलाना मस्जिद से सटी हुई है।
इधर प्रशासन ने नमाज की व्यवस्था के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। तेज बारिश के बीच जेसीबी मशीन की मदद से खसरा नंबर 612 की जमीन का समतलीकरण कराया जा रहा है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की जा रही है।









