नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आ सकते हैं। उनके दौरे के दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग से जुड़े दो बड़े प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है।
इनमें 100 से अधिक सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों का अपग्रेड और रूस के पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टेल्थ फाइटर की पेशकश शामिल है।
100 से ज्यादा सुखोई को ‘सुपर सुखोई’ बनाने की तैयारी
प्रस्ताव के तहत 100 से अधिक सुखोई-30MKI विमानों को रूसी तकनीकी सहयोग से अपग्रेड किया जा सकता है। अपग्रेड में इंजन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और हथियारों की क्षमता बढ़ाने पर काम हो सकता है। इससे विमानों की परिचालन क्षमता और मारक क्षमता में इजाफा होने की उम्मीद है।
फिलहाल भारत करीब 63 हजार करोड़ रुपये की लागत से 84 सुखोई-30MKI विमानों को ‘सुपर सुखोई’ स्तर पर अपग्रेड कर रहा है।
रूस Su-57 की पेशकश कर सकता है
रूस भारत को पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट की पेशकश भी कर सकता है। इसके साथ भारत में संयुक्त उत्पादन और तकनीक साझा करने का प्रस्ताव भी सामने रखा जा सकता है।
रक्षा क्षेत्र में इस प्रस्ताव को भारत की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की जरूरत से जोड़कर देखा जा रहा है।
रूसी विशेषज्ञों ने HAL यूनिट का किया दौरा
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, सुखोई-30MKI के अपग्रेड को लेकर रूसी विशेषज्ञों की एक टीम HAL की नासिक यूनिट का दौरा कर चुकी है। अपग्रेड प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए भारत और रूस के बीच अलग समझौता किया जाना है।
2018 में संयुक्त फाइटर प्रोजेक्ट से अलग हुआ था भारत
भारत और रूस पहले भी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर संयुक्त परियोजना पर काम कर चुके हैं। दोनों देशों ने 2007 में इस तरह के फाइटर को विकसित करने की परियोजना शुरू की थी, लेकिन भारत 2018 में इस प्रोजेक्ट से अलग हो गया था।
अब रूस Su-57 के जरिए भारत के सामने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का विकल्प रखने की तैयारी में है।
2032 तक भारत का अपना 5वीं पीढ़ी का फाइटर
भारत अपना पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान विकसित कर रहा है, लेकिन इसके 2032 तक तैयार होने की संभावना बताई जा रही है। ऐसे में उससे पहले की जरूरत पूरी करने के लिए Su-57 जैसे विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
वहीं चीन के पास स्टेल्थ फाइटर मौजूद हैं और पाकिस्तान को भी ऐसे विमान मिलने की बात सामने आती रही है। ऐसे में भारत के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की क्षमता बढ़ाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









