मिट्टी के चाक से निकली तरक्की की राह

राजितराम ने खड़ा किया 60 हजार की कमाई वाला कारोबार

माटीकला रोजगार योजना से पांच लाख का ऋण, इलेक्ट्रिक चाक और पग मिल ने बढ़ाया उत्पादन; सात लोगों को मिला काम

अंबेडकरनगर। गोबरहा बसंतपुर के राजितराम प्रजापति ने पुश्तैनी कुम्हारी को आधुनिक तकनीक से जोड़कर कारोबार का दायरा बढ़ाया है। कभी सीमित संसाधनों में दीये और मटके बनाने वाले राजितराम अब कप, प्लेट, गिलास और कुल्हड़ समेत कई तरह के मिट्टी के उत्पाद तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत मिले ऋण और अनुदान से उन्होंने आधुनिक उपकरण लगाए। इससे उनका उत्पादन करीब तीन गुना हुआ और शुद्ध मासिक आय 55 से 60 हजार रुपये तक पहुंच गई।

योजना की मदद मिली तो चाक ने पकड़ी रफ्तार
राजितराम वर्षों से पारंपरिक कुम्हारी का काम कर रहे थे। कारोबार बढ़ाने की इच्छा थी, लेकिन पूंजी और आधुनिक उपकरणों की कमी बड़ी बाधा थी।

वर्ष 2024 में उन्हें उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड और उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड की स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पांच लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया।

बैंक ऑफ बड़ौदा की बसंतपुर शाखा से उन्हें पांच लाख रुपये का ऋण मिला। योजना के तहत 25 प्रतिशत सब्सिडी/अनुदान का लाभ भी मिला।

हाथ का चाक छोड़ा, इलेक्ट्रिक चाक अपनाया
ऋण मिलने के बाद राजितराम ने कारोबार में तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया। हाथ से चलने वाले पारंपरिक चाक की जगह इलेक्ट्रिक चाक लगाया। मिट्टी तैयार करने के लिए पग मिल मशीन भी स्थापित की।

मशीनों के इस्तेमाल से काम की रफ्तार बढ़ी और श्रम कम हुआ। राजितराम के अनुसार इससे दैनिक उत्पादन करीब तीन गुना हो गया।

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